With_u_Navendu
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बोल के लब आज़ाद हैं तेरे!
22/10/2025
📢देखिये नीतीश का खेला। देखिये ये पहली तस्वीर-घेरे में एक मुट्ठी।ये संजय झा की मुट्ठी है। नीतीश ने उनके हाथ के हस्तक्षेप पर नाराज़गी दिखाई। नीतीश के चेहरे का भाव भी देखिये। तस्वीर जूम करिये।
ग़ज़ब के फ़ॉर्म में दिखे नीतीश। संजय झा को खुलेआम मंच पर कहा- ग़ज़बे आदमी हैं! संजय झा अवाक रह गये।
बीजेपी भी सकते में। मुजफ्फरपुर में यही चर्चा हो रही है कि नीतीश कुमार ने तो ग़ज़ब कर दिया। लगता है, पूरे फॉर्म में आ चुके हैं नीतीश बाबू।
👁️बीजेपी के जिस स्लीपर सेल के रूप में जेडीयू के कुछ बड़े नेताओं का ज़िक्र आम है, वह आज नीतीश कुमार के तेवर देख भक्क रह गये होंगे। संजय झा की फिर हिम्मत न हुई कि दोबारा वे कुछ कहें या करें।
#मुजफ़्फ़रपुर_में_क्या_हुआ? हुआ यह कि नीतीश कुमार चुनाव प्रचार करने मुजफ़्फ़रपुर पहुंचे हुए थे। औराई से एनडीए प्रत्याशी श्रीमति रामा निषाद के चुनाव प्रचार में।
मुजफ़्फ़रपुर के औराई से रामा निषाद, बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। रामा निषाद, अजय निषाद की पत्नी हैं। अजय निषाद बीजेपी से सांसद रहे हैं। बीच में कांग्रेस में आये और फिर बीजेपी में लौट गये। उनकी पत्नी को बीजेपी अपने सिटिंग विधायक रामसूरत राय का टिकट काट कर लड़ा रही है। उनके पक्ष में नीतीश की प्रचार सभा थी। नीतीश बुलंद बॉडी लैंग्वेज और बुलंद आवाज़ में जम कर भाषण दिये।
📢 चुनावी सभा मंच पर अपने दिये भाषण में नीतीश, उसी रौ में दिखाई और सुनाई दे रहे थे, जिसके लिए वे जाने-पहचाने जाते रहे हैं और जो उनकी प्रचार भाषण शैली रही है।
पिछली समस्तीपुर की चुनावी सभा से भी कहीं अधिक आत्मविश्वास से भरे दिख रहे थे नीतीश कुमार। जबकि वहां ज़मीनी स्तर पर रामसूरत राय के समर्थक बवाल काट रहे। बीजेपी नेतृत्व के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।
#भाषण_के_अंत_में जब रामा देवी को माला पहनाने के लिए उन्होंने पब्लिक को जोश जगाते हुए पूछा कि "त इनको जिताइयेगा न?"
*और माला पहनाने के लिए नीतीश, डैश से आगे बढ़े तो रामा देवी के पीछे से आकर जेडीयू के सांसद और कार्यकारी अध्यक्ष *संजय कुमार झा ने रामा देवी के दोनों हाथ आगे करवा दिए। *नीतीश को ये अच्छा नहीं लगा, सही भी नहीं लगा।
*उन्होंने संजय झा को तुरंत झिड़की लगाई कि... ग़ज़बे आदमी हैं आप, हाथ काहे बढ़वा रहे!...
*रामा देवी को कहा,हई लीजिये और उनके गले में माला डाल दिया। ताली बजी। संजय ठगे रह गये।
*नीतीश ने कहा, इनको जिताइये, हम और भी बढ़िया काम करेंगे। केंद्र का भी सहयोग मिलेगा।...
ा_समाप्त_चर्चा_तेज़ इस प्रकरण से अब चर्चा तेज़ है। ये नोटिस किया जा रहा है कि बीच वाले नीतीश और आज के नीतीश में एक फर्क़ तो साफ दिखा कि जिस नीतीश कुमार को "चार चौकड़ी" संजय झा, अशोक चौधरी, विजय कुमार चौधरी ललन सिंह घेरे में लेकर उन पर निगरानी और डिक्टेशन करते दिखते रहे थे। टोका-टोकी, रोका-रोकी करते थे। वो दृश्य चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश के पब्लिक मूवमेंट में से अचानक लापता हो चुका है।
💥संजय झा ने मुजफ्फरपुर में टोकने-रोकने की कोशिश की तो उन्हें नीतीश ने सुना दिया। अन्यथा वे तो बच्चे की तरह इनकी बात मान लेते थे। लेकिन एनडीए में अपने हिस्से और भूमिका को लेकर हफ़्ता दस रोज पहले, नीतीश कुमार होश में आये तो अब पूरे होशो-हवास में दिख रहे। कहने वाले इसे जागृत नीतीश बता रहे हैं।
ोटर_की_टिप्पणी संजय झा भीतर से भजपाई हैं। महिला प्रत्याशी को माला पहनाने से रोक कर इसे एक बार फिर विवाद का विषय और नीतीश को तमाशा बनाना चाह रहे हैं लोग। बाकी फॉर्म में तो आ गये हैं नीतीश कुमार। बीजेपी के लिए ये चिंता का विषय हो सकता है। कटारी तो संजय झा पर चला ही दी नीतीश ने।... ना समझे वो अनाड़ी है!
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