Dhwaz Forever
04/01/2024
कृष्ण के पिता वसुदेव की 14 पत्नियां थी। महाभारत खिलभाग़ हरिवंश पर्व के अध्याय 35 में इस तरह लिखा है :– जनमेजय । वसुदेवजी की जो चौदह सुन्दराङ्गी पत्नियां थी, उनमें रोहिणी ओर रोहिणी से छोटी इन्दिरा, वैशाखी, भद्रा तथा पांचवी सुनाम्नी-ये पांच पौरव वंश की थीं तथा सहदेवा, शान्तिदेवा, श्रीदेवा, देवरक्षिता, वृकदेवी, उपदेवी तथा सातवीं देवकी-ये सात देवक की पुत्रियां थीं तथा सुतनु ओर वडवा ये दो उनको परिचर्या करने वाली स्त्रियाँ थीं ॥
कृष्ण की 8 पटरानियां थी जिनका नाम महाभारत खिलभाग के विष्णु पर्व के अध्याय 60 में उनका नाम इस प्रकार लिखा है। रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, मित्रविन्दा, कालिन्दी, भद्रा(रोहिणी), नाग्नजिती तथा लक्ष्मणा। इसी में लिखा है कि मित्रविन्दा और भद्रा उर्फ रोहिणी कृष्ण की बुआ की लड़कियां थी। इसी के आगे अध्याय 63 में लिखा है कि इसके अलावा 16100 लड़कियां भोमासुर उर्फ नरकासुर की कैद में थी जिन को कृष्ण ने आजाद करवाया था और उनसे शादी की थी। इसीलिए 16108 पत्नियां बताई जाती हैं। भागवत पुराण में ऐसा ही लिखा है ( भागवत पुराण दशम स्कंद अध्याय 59 )
राधा कृष्ण की पत्नी थी ऐसा कही लिखा नही और जहां लिखा है वहां यह भी लिखा है कि राधा की शादी योशोदा के सगे भाई रायाण से तय हुई थी यानी कृष्ण की मामी थी लेकिन राधा ने अपनी छाया राधा की शादी रायाण से करवाई और खुद की शादी कृष्ण से करवाई। (ब्रह्मवैवर्त पुराण प्रकृति खंड अध्याय 49.) एक ही समय में असली राधा कृष्ण के साथ और छाया राधा कृष्ण के मामा रायाण के साथ होना एक ही समाज में संभव नहीं है इसलिए राधा को शायद कृष्ण की पत्नी होना नही लिखा जाता। सीता भी राम ने अग्नि के हवाले कर दी थी और राम के साथ छाया सीता थी जिसको अग्नि से प्राप्त किया था और जिसका अपहरण रावण ने किया और रावण को मारने के बाद अग्नि परीक्षा नही बल्कि छाया सीता को अग्नि के हवाले कर के असली सीता को हासिल किया था ऐसा भी लिखा होता है। इसी तरह सूर्य की पत्नी संज्ञा भी सूर्य के ताप से त्रास हो कर अपनी छाया संज्ञा को सूर्य के पास छोड़ दिया जिससे सूर्य ने बच्चे पैदा लिए क्योंकि सूर्य को यह भेद पता ही नहीं चला। असली संज्ञा घोड़ी बनी हुई थी और सूर्य को पता लगने पर संज्ञा को ढूंढने के लिए गया और घोड़ा बन कर घोड़ी बनी संज्ञा से भी बच्चे पैदा किए। यह कहानी अगली पोस्ट में।
जहां कृष्ण की 8 पटरानियों में 2 तो उसकी बुआ की लड़कियां ही थी, वही कृष्ण के पुत्र परदुम्न ने अपने मामा की लड़की शुभांगी से शादी की थी। महाभारत खिलभाग के 61 वे अध्याय में यह लिखा हुआ है और इस विवाह से अनिरुद्ध का जन्म हुआ। कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध ने भी शादी अपने मामा की बेटी रूकमवती से किया।
सनातन हिन्दू धर्म में इस तरह का विवाह धर्म विरुद्ध है। मनुस्मृति में भी लिखा हुआ है। भागवत पुराण दशम स्कंद अध्याय 61 में इस प्रकार लिखा है :–
रुक्मी का भगवान् श्रीकृष्णके साथ पुराना बैर था। फिर भी अपनी बहिन रुकमणी को प्रसन्न करने के लिये उसने अपनी पोती का विवाह रुकमणी ( कृष्ण की पत्नी और रुक्मी की बहन) के पौत्र, अपने नाती (दोहित्र) अनिरुद्ध के साथ कर दिया। यद्यपि रुक्मी को इस बातका पता था कि इस प्रकार का विवाह-सम्बन्ध धर्म के अनुकूल नहीं है, फिर भी स्नेह बंधनों में बंध कर उसने ऐसा कर दिया॥(श्लोक 25)
अर्जुन ने भी अपने मामा की बेटी सुभद्रा का अपहरण कर के शादी की थी। सुभद्रा कृष्ण के पिता और कृष्ण की माता देवकी की पुत्री थी। यह भागवत पुराण के स्कंद 9 के अध्याय 24 श्लोक 55 में लिखा हुआ है। सुभद्रा के भाई कृष्ण ने खुद अपनी बुआ के पुत्र अर्जुन को अपनी बहन के अपहरण करने के लिए उकसाया था। महाभारत के आदि पर्व के अध्याय 218 अध्याय में इस प्रकार लिखा है :–
सुभद्रा को देखते ही अजुनके हृदय में कामाग्नि प्रज्वलित हो उठी | उनका चित्त उसी के चिन्तन में एकाग्र हो गया । भगवान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन की इस मनोदशा कों भाप लिया और कहा कि यह क्या, वनवासी का मन भी इस तरह काम से उन्मादित हो रहा है। (श्लोक 15, 16) यह मेरी और सारण की सगी बहिन है। (श्लोक 17) इसका स्वयंवर होगा और स्त्रियों का स्वभाव अनिश्चित हुआ करता है (श्लोक 21) इसलिए अर्जुन ! मेरी राय तो यही है कि तुम मेरी कल्याणमयी बहिन को बलपूर्वक हर ले जाओ। कौन जानता हैः स्वयंवरमें उसकी क्या चेष्टा होगी--वह किसे वरण करना चाहेगी ! (श्लोक 23)
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Pankaj Dhwaz
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