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शातिर: द मर्डरर | Kiran Munda | shabd.in 31/12/2024

रात का समय था जब उस आधी अधूरी सी बनी हुई बिल्डिंग कुछ खटर पटर की आवाज़ आ रही थी। वो बिल्डिंग कई मंजिल ऊंची थी पर, सही से बनी हुई नहीं थी, उसकी जो सबसे नीचे वाली मंज़िल थी वही कुछ अच्छी हालत में थी, और वही से आवाज़ें भी आ रहीं थीं।

उस कमरे में एक जीरो वाट का बल्ब जल रहा था और उसके ठीक नीचे एक आदमी कुर्सी से बंधा हुआ था, और वो लगातार उन रस्सियों से आज़ाद होने की कोशिश कर रहा था जिसके कारण उसकी कुर्सी हिल रही थी, और वो आवाज़ें हो रहीं थीं ।
उस आदमी की उम्र 50 से 60 के बीच की रही होगी, और उसके कपड़ों को देख कर साफ़ बताया जा सकता था कि वो काफ़ी अमीर था ।

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शातिर: द मर्डरर | Kiran Munda | shabd.in Read शातिर: द मर्डरर By Kiran Munda exclusively on shabd.in - रिश्तों के भंवर में उलझी एक कहानी जहां हर रिश्ते की अपनी कहानी है!

जीवन के रंग | Laxmi Tyagi | shabd.in 31/12/2024

पारुल पढ़ी -लिखी होने के बावजूद, संस्कारों ,परम्पराओं जैसे बंधनों में बंधी ,एक आस्तिक महिला थी। विवाह के बाद अब तो ससुराल ही उसका अपना घर था। उस आशियाने को उसने बड़े प्यार और जतन से सजाया। उसने अपनी तरफ से पूरा प्रयत्न किया कि वो सास -ससुर के साथ -साथ घर के अन्य सदस्यों का दिल भी जीत ले। कई बार काम करते -करते थक जाती। कई बार ,कोई काम यदि नहीं आता तो उसे सीखने का प्रयत्न करती। सिलाई -कढ़ाई ,बुनाई और पढ़ाई सभी में तो पारंगत थी। पाक कला में भी निपुण थी। ससुराल वालों को और क्या चाहिए ?बहु मेहनती है ,बाहर इधर -उधर नहीं घूमती ,काम में लगी रहती है तो फिर कहाँ कमी रह गयी ?वो समझ नहीं पा रही थी। पारुल जैसी बहु पाकर किसी भी सास को अपनी बहु पर नाज़ होना चाहिए लेकिन ऐसा कुछ नज़र नहीं आता। हमेशा सास के तेवर चढ़े रहते ,काम में कमी न निकाल पातीं तो मायके से आये सामान में या उनके व्यवहार को लेकर मीन -मेख निकालतीं। उसने हर सम्भव प्रयत्न किया कि वो खुश रहें।

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जीवन के रंग | Laxmi Tyagi | shabd.in Read जीवन के रंग By Laxmi Tyagi exclusively on shabd.in - इतना लम्बा जीवन हम जीते हैं,उसमे सुख है,दुःख है, मस्ती है,मिलना है,बिछुड़ना है,जीवन की प...

तेरी मेहरबानियां ... तेरी कदरदानियां ... | रिया सिंह सिकरवार " अनामिका " | shabd.in 23/12/2024

एक औरत अपने पति से झगड़ा कर रही थी और उससे पैसे मांग रही थी । वो कह रही थी कि तुम्हारे कामाने से क्या फायदा । रोज तो तुम दारू पीकर और जुआ खेल कर पैसा बरबाद कर देते हो । घर में कुछ भी नहीं हैं , मैं अपने बच्चे को क्या खिलाऊंगी । कम से कम उस बच्चे के बारे में तो सोच लिया करो।

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तेरी मेहरबानियां ... तेरी कदरदानियां ... | रिया सिंह सिकरवार " अनामिका " | shabd.in Read तेरी मेहरबानियां ... तेरी कदरदानियां ... By रिया सिंह सिकरवार " अनामिका " exclusively on shabd.in - एक औरत अपने पति से झगड़ा कर रही थी और...

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