Sirangsar dham

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22/06/2025

# #*🚩🔱राधे राधे 🔱 🚩*

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*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

*!! अंत का साथी !!*
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एक व्यक्ति के तीन साथी थे। उन्होंने जीवन भर उसका साथ निभाया। जब वह मरने लगा तो अपने मित्रों को पास बुलाकर बोला, “अब मेरा अंतिम समय आ गया है। तुम लोगों ने आजीवन मेरा साथ दिया है। मृत्यु के बाद भी क्या तुम लोग मेरा साथ दोगे?” पहला मित्र बोला, “मैंने जीवन भर तुम्हारा साथ निभाया। लेकिन अब मैं बेबस हूँ। अब मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता।” दूसरा मित्र बोला, मैं मृत्यु को नहीं रोक सकता।

मैंने आजीवन तुम्हारा हर स्थिति में साथ दिया है। मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि मृत्यु के बाद तुम्हारा अंतिम संस्कार सही से हो। तीसरा मित्र बोला, “मित्र! तुम चिंता मत करो। में मृत्यु के बाद भी तुम्हारा साथ दूंगा। तुम जहां भी जाओगे, मैं तुम्हारे साथ रहूंगा।” मनुष्य के ये तीन मित्र हैं- माल (धन), इयाल (परिवार) और आमाल (कर्म)। तीनों में से मनुष्य के कर्म ही मृत्यु के बाद भी उसका साथ निभाते हैं।

*शिक्षा:-*
हमें अच्छे कर्म करने चाहिए। यही वो दौलत हैं जो मरने के बाद भी इंसान के साथ जाती हैं। अतः अच्छे कार्यों में इस अनमोल जीवन को बिताना चाहिए।

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*

*📿श्री राधे📿*

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*22 JUNE 2025*

🦋 *आज की प्रेरणा* 🦋

ज्ञान का उपयोग केवल पढ़ने, सुनने और अच्छा महसूस करने के लिए नहीं किया जाता है, बल्कि दैनिक जीवन में प्रयोग और कार्यान्वित करने के लिए किया जाता है।

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*आज से हम* परमात्म ज्ञान को अपने जीवन में उतारें...

*🌹श्री राधे 🌹*

*Sirangsar dham sarkar*

🚩🔱📿🌹🌺🔱🚩

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17/06/2025

*🚩🔱राधे राधे 🔱 🚩*

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*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

*!! अष्टावक्र का ज्ञान !!*
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ऋषि को अपने शिष्य कहोड़ की प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी पुत्री सुजाता का विवाह कहोड़ से कर दिया। सुजाता के गर्भ ठहरने के बाद ऋषि कहोड़ सुजाता को वेदपाठ सुनाते थे। तभी सुजाता के गर्भ से बालक बोला - ‘पिताजी! आप गलत पाठ कर रहे हैं। इस पर कहोड़ को क्रोध आ गया और शाप दिया तू आठ स्थानों से वक्र (टेढ़ा) होकर पैदा होगा। कुछ दिन बाद कहोड़, राजा जनक के दरबार में एक महान विद्वान बंदी से शास्त्रार्थ में हार गए और नियम अनुसार, कहोड़ को जल समाधि लेनी पड़ी। कुछ दिनों बाद अष्टावक्र का जन्म हुआ।

एक दिन माँ से पिता की सच्चाई पता चली, तो अष्टावक्र दुखी हुआ और बारह साल का अष्टावक्र बंदी से शास्त्रार्थ करने के लिए राजा जनक के दरबार में पहुंचा। सभा में आते ही बंदी को शास्त्रार्थ के लिए चुनौती दी, लेकिन अष्टावक्र को देखकर सभी पंडित और सभासद हंसने लगे, क्योंकि वो आठ जगह से टेढ़े थे, उनकी चाल से ही लोग हंसने लगते थे। सभी अष्टावक्र पर हंस रहे थे और अष्टावक्र सब लोगों पर। जनक ने पूछा- ‘हे बालक! सभी लोगों की हंसी समझ आती है, लेकिन तुम क्यों हंस रहे हो?

अष्टावक्र बोले - महाराज आपकी सभा चमारों की सभा है, जो मेरी चमड़ी की विकृति पर हंस रहे हैं, इनमें कोई विद्वान नहीं! ये चमड़े के पारखी हैं। मंदिर के टेढ़े होने से आकाश टेढ़ा नहीं होता है और घड़े के फूटे होने से आकाश नहीं फूटता है। इसके बाद शास्त्रार्थ में बंदी की हार हुई। अष्टावक्र ने बंदी को जल में डुबोने का आग्रह किया। बंदी बोला मैं वरुण-पुत्र हूं और सब हारे ब्राह्मणों को पिता से पास भेज देता हूं। मैं उनको वापस बुला लेता हूं। सभी हारे हुए ब्राह्मण वापस आ गए, उनमें अष्टावक्र के पिता कहोड़ भी थे। इसके बाद राजा जनक ने अष्टावक्र को अपना गुरु बना लिया और उनके आत्मज्ञान प्राप्त किया। राजा जनक और अष्टावक्र के इस संवाद को अष्टावक्र गीता के नाम से जाना जाता है।

*शिक्षा :-*
जैसे आभूषण के पुराने या कम सुंदर होने से सोने की कीमत कम नहीं हो जाती, वैसे शरीर की कुरूपता से आत्म तत्व कम नहीं होता। कभी किसी व्यक्ति के शरीर की सुंदरता को देखकर प्रभावित या किसी की कुरूपता को देखता घृणा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि शरीर तो हाड़-मांस से बना है। देखना है तो उसका ज्ञान, प्रेम और दिव्यता देखो, क्योंकि आत्मा सबका समान है।

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है, उसके पास समस्त है।।*

*📿श्री राधे📿*

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*17 JUNE 2025*

*🦋 आज की प्रेरणा 🦋*

चरण उनके ही पूजे जाते हैं जिनके आचरण पूजने योग्य होते हैं।

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*आज से हम* अपने आचरण को पूजने योग्य श्रेष्ठ बनाएँ...

*🌹श्री राधे 🌹*

*Sirangsar dham sarkar*

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