Poet Papers

Poet Papers

Share

29/08/2025

मैंने सोचा था इश्क़ में कोई मुझसा मुझको चाहेगा
जो मुझको मुझसा देखेगा और आँखो में बसाएगा।
जो समझेगा सब बात मेरी दोस्त मेरा बन पाएगा
जो शब्दों के इस जाल में नहीं मुझको फसाएगा।

मैं ग़लत रहा ये सोच कर की इश्क़ तुम्हारा पाक है
तुम में तो है अहम बहुत हाँ इश्क़ तुम्हारा ख़ाक है।
मैं दिल से सोचा करता था बस दिल में तुमको रखता था
मैं सोचे बिना ही तुमसे सब बाते किया करता था।

तुमने मुझको जाना कहाँ अपना कभी माना कहाँ
मुझे समझने में देरी हुई मैं तो था अनजाना यहाँ।
कितनी आसानी से तुमने हर बार मुझे धकेल दिया
नाम दिया इसे इश्क़ का और साथ मेरे एक खेल किया।

✍🏻




{Hindi lekh, hindi sahitya, lekhak, lekhika, hindi poetry, hindi nama, couple poetry, poetry, hindi shayari, love poetry}

PC- Pinterest

25/08/2024

आ ही गया ना आख़िर सब्र तुम्हें भी
आना ही था कोई और ज़रिया ही कहाँ था।

कब तक लड़ते, कब तक झगड़ते ख़ुद से
कब तक चीखते दिल ही दिल में और
कब तक ख़ुद को ख़ुद ही मनाते रहते।

कोई नहीं आया ना ख्याल पूछने?
कोई नहीं आया ना सवाल पूछने?
सबने पूछा होगा ना कैसे हो तुम?
मगर कोई नहीं आया ना दिल
का हाल पूछने?

जैसे तुम हो गये हो ना मैं भी
ठीक वैसा ही हो गया हूँ।
ख़ुद को अब ख़ुद भी समझ नहीं आता
ना जाने मैं कैसा हो गया हूँ।

आ तो गया है सब्र मगर बहुत कुछ खोना पड़ा है।
मैं जानता ही नहीं कितना अकेले रोना पड़ा है।

✍🏻🌻

Want your public figure to be the top-listed Public Figure in Modinagar?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Category

Website

Address

Modinagar