Dr Ravindra Rana
डेढ दशक से अधिक समय से श्रमजीवी पत्रकार। दैनिक जागरण , डीएलए, हिन्दुस्तान, अमर उजाला में सेवाएं। वेस्ट यूपी की सियासत, किसान, खाप पंचायत, डेवलपमेंट और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ग्राउंड रिपोर्टिंग। पत्रकारिता व जनसंचार में एमए, एलएलबी, पीएच.डी.
06/05/2025
जुदा सियासत, फक्कड़ मिजाज और किसानों के हक की आवाज़ — यादें चौधरी अजित सिंह की
आज 6 मई, चौधरी अजित सिंह जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
जब राजनीति में प्रचार और पॉवर का बोलबाला था, तब चौधरी साहब एक ऐसे नेता के रूप में उभरे जो बिना दिखावे, बिना सुरक्षाकर्मी, बिना पब्लिसिटी स्टंट के किसानों की लड़ाई सच्चे मन से लड़ते रहे। अमेरिका में कंप्यूटर इंजीनियर की नौकरी छोड़, उन्होंने गांव, ज़मीन और किसान के बीच रहना चुना — और यही उनकी पहचान बन गई।
गन्ने की मिठास से सराबोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान आज भी चौधरी साहब को बुजुर्ग की तरह याद करते हैं — वो नेता जो ठहाकों में गंभीर बातें कह जाते थे, जो मंच पर गन्ना चूसते थे और 12 तुगलक रोड को आम किसान का घर बना दिया था।
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जब आंदोलन कमजोर पड़ने लगा, तब उनका एक फोन राकेश टिकैत को नई ताकत दे गया। मेरठ से लखनऊ पदयात्रा हो या जाट आरक्षण की लड़ाई — चौधरी साहब हर मोर्चे पर डटे रहे, लेकिन कभी खुद को "नेता" नहीं समझा।
उनका रहन-सहन, संवाद और सिद्धांत आज की राजनीति के लिए मिसाल है।
🙏 उदयवाणी के संपादक श्री रामबोल तोमर जी का हृदय से आभार, जिन्होंने इस लेख को प्रकाशित कर इन स्मृतियों को सहेजने का मंच दिया।
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