Apni Azad Soch

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11/05/2026
26/10/2025

वाह रे इंसान!
‎जब तू दूसरों की मर्जी से जीता था तब ये सोचता था कि हम अपनी मर्जी से कब जीयेंगे और जब अपनी मर्जी से जीने का समय आया तब तू दूसरों की मर्जी को अपनी मर्जी बताने लगा।
‎अरे वो इंसान!
‎तू पाखंड क्यों करता है तू सच क्यों नहीं बोल देता कि मुझे ग़ुलामी पसन्द है और मैं गुलामी ही करूंगा।

20/10/2025

ईश्वर या धर्म को मानना कभी भी अंधभक्ति या पाखंड नहीं होता। असली आस्था और विश्वास वही हैं जो समझ और विवेक के साथ हों। अंधभक्ति तब शुरू होती है जब आप किसी कार्य या विश्वास के सच को जान सकते हैं, समझ सकते हैं, पर जानने की इच्छा ही नहीं रखते और फिर भी उसी पर चलते हैं। यह केवल अपने विवेक को दरकिनार करना है और बिना सोच-समझे मान्यताओं का पालन करना है।

‎पाखंड उससे भी आगे का रूप है। जब कोई व्यक्ति वही कार्य करता है और दूसरों से यह कहता है या यह विश्वास दिलाने की कोशिश करता है कि यह सही है, तब वह पाखंडी बन जाता है। यानी पाखंड में न केवल अज्ञान का पालन होता है, बल्कि दूसरों को गुमराह करने का प्रयास भी जुड़ जाता है।

‎धर्म और आस्था का असली मतलब यही है कि आप जानने, समझने और सोचने के बाद विश्वास करें। जब आप अपने विवेक को नजरअंदाज कर किसी अज्ञान को अपनाते हैं, तो वह अंधभक्ति है। और जब आप उसी अज्ञान को दूसरों पर थोपते हैं, तो वह पाखंड है।
‎Azad Thinking

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