Zindginama
केंद्र सरकार ने हाल मे ही अपने उपक्रमों वो सरकारी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे दिवाली पर अपने विभाग के अधिकारियों वी कर्मचारियों को दी जाने वाले उपहार की परम्परा बन्द कर दें यानी इस साल कोई भी दिवाली गिफ्ट नहीं दी आएगी।ऐसा खर्चों को कम करने के उद्देश्य से किया जा रहा है,ऐसा वित्त मंत्रालय का कहना है।
सरकार अगर मिव्यवता की दृष्टि से यह निर्णय ले रही है तो इसका स्वागत है,पर सरकार अपने खर्चों में भी मितव्ययता दिखाए तो बात बनती है नहीं तो यह माना जाएगा कि सरकार की कथनी और करनी में बहुत अन्तर है जो कि अमूमन किसी भी पार्टी की सरकार हो,कमोबेश एक सा रहता है।
छोटी छोटी उपलब्धियों के लिए पूरे पेज के विज्ञापन,जिनका कोई मतलब नहीं है,क्या फिजूलखर्ची नहीं है।
मंत्रियों, सांसदों, ब्यूरोक्रेट्स के कार्यालयों,घरों में पुराने जमाने के तालुकेदारों,ब्रिटिश काल के कलेक्टरों को भी मात करने वाली साज सज्जा फिजूलखर्ची नही है।
तरह तरह के बैनर व बोर्ड अनावश्यक लगवाना क्या फिजूलखर्ची नहीं है।
आप जो करें वो सब सही और दिखने के लिए दिवाली गिफ्ट बंद करना मितव्ययता।बड़े अधिकारियों के यहां तो दिवाली में उनके मातहत,व्यापारी वो अन्य लाभार्थी इतनी गिफ्ट दे जाएंगे कि वो सड़ती रहती है,पर शायद ही कुछ बांटते होगा,क्यों उन्होंने सिर्फ लेना या कहें शोषण करना सीखा है।आपको कुछ मिल जाए तो आप भाग्यशाली हैं।
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