Arjun Arun Rao
25/06/2023
#आदिपुरुष_पर_बहस_अरून_और_मुंतशिर_के_साथ।
: आपका बहुत-बहुत स्वागत है मनोज मुंतशिर शुक्ला जी।
: जी धन्यवाद।
: मनोज मुंतशिर शुक्ला जी आजकल आदिपुरुष फिल्म को लेकर बहुत चर्चा में है फिल्म में दिखाया गया सीन व संवाद दर्शकों को अच्छा नहीं लग रहा है,
उनका कहना है कि रामायण की मूलभूत पटकथा के साथ छेड़छाड़ की गई है संवाद उस काल के हिसाब से नहीं है।
इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
: देखिए अरुन जी मै आज के युवा व समाज को ध्यान में रखकर ही संवाद की कल्पना किया है,
जीन संवादों का विरोध हो रहा है वो संवाद आज की युवा पीढ़ी प्रयोग करती है।
: मनोज जी जैसे कि आपने कहा कि आज के युवा व समाज को ध्यान में रखकर ही संवादों का कल्पना किया गया है,
तो यहां मेरे मन में एक सवाल आ रहा है कि रामायण सच्ची घटना है तो उसे वैसे ही दिखाना चाहिए था जैसे लिखा गया है, इसमें कल्पना करने की क्या जरूरत आन पड़ी?
वास्तविक रामायण के साथ किसी भी तरह के संशोधन की आवश्यकता ही क्या थी पौराणिक और धार्मिक परिचय अपनी वास्तविकता से प्रकाशित होता है?
: जी देखिए यदि थोड़ा बहुत हम चेंज नहीं करेंगे तो हमारा प्रोजेक्ट लास में चला जाएगा हम सिर्फ यहां पैसा कमाने आए हैं नथिंग एल्स ओके।
: ओके सर, प्रत्येक वर्ष मेरे गांव #रामपुर_बुजुर्ग में रामलीला का आयोजन किया जाता है मैंने गांव में रामलीला देखा है।
कई बार रामलीला मंचन के दौरान हास्यास्पद भाषा का प्रयोग होता था मगर लोग उस का आनंद लेते थे कोई विरोध नहीं करता था लेकिन आज के समय में माहौल ऐसा बना दिया गया है कि हर छोटी-छोटी बातों पर हमारी भावनाएं आहत हो जाती हैं!
: जी वही मैं कह रहा हूं कि हमारा समाज इतना संवेदनशील कैसे हो गया है कि हर छोटी-छोटी बातों पर आहत हो जाता है।
: लेकिन सर यह फौज बनाने का श्रेय आपको भी दिया जा रहा है कुछ थींकर का कहना है कि जिस चक्रव्यूह में आज मनोज मुंतशिर फंसे हैं उसको बनाने में उनका खुद का हाथ रहा है जब सोशल मीडिया के थ्रू लोगों को आक्रोशित किया जा रहा था तब ये लोगों को अपना भरपूर योगदान उस आक्रोश को भड़काने के लिए दे रहे थे।
देश में जिस प्रकार "जय श्रीराम" के नारे को आक्रोश का पर्याय बनाया गया,
श्री राम जी की सौम्य छवि को आक्रोशित दिखाने का प्रयास किया गया,
उसके सुत्रधारको में से एक आप को भी बताया जा रहा है इस पर आप क्या कहेंगे?
: मैं आज लोगों के नजर में असफल हुआ हूं मेरे प्रति लोग सकारात्मक और नकारात्मक सोच रखेंगे इसमें मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा।
: एक बहुत बड़े जर्नलिस्ट है Dilip C Mandal कहते हैं कि मनोज मुंतशिर शुक्ला की समस्या यह है कि उसने धर्म ग्रंथों का पारायण नहीं किया है मैंने रामायण और रामचरितमानस इतने गौर से हर शब्द और हर लाइन पड़ी है उसका एक चौथाई भी शुक्ला ने पढी होती तो इतनी गलतियां ना करता शुक्ला अनपढ़ है,कुपढ है उसे ब्राह्मण जाति से निकाल देना चाहिए।
शुक्ला अगर बिना किताब सामने रखे रामचरितमानस रामायण की 10 लाइनें सुना दे तो मैं उसको ब्राह्मण मान लूंगा वरना उससे जनेऊ पहनने का अधिकार छीन लेना चाहिए।
इतने कडवे कटाक्ष पर आप क्या कहना चाहेंगे मनोज जी?
: इस समय जाति का वर्गीकरण
कर्म अधारित नही जन्म अधारित है।
मैं जन्म जात ब्राह्मण हू हमारे ही पुर्वजो ने इस
सनातन धर्म को मार्गदर्शक करते हुए यहा तक लाया है ऐसा इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि शिक्षा लेने व देने का अधिकार हम लोगों का ही था हमारे पुर्वजो ने इतना मजबूत खुटा ठोक कर गए है कि हम लोगों को कोई निकाल नहीं सकता रही बात 10 लाइने सुनाने की तो यह हमारी खानदानी पेशा है पढ़ने की
सुना देंगे कभी।
: एक और आखीरि सवाल मनोज जी क्या आपने सेंसर बोर्ड को पैसे देकर फिल्म पास कराई थी?
: देखिए ऐसा कुछ नहीं है । फिल्म से जबभी किसी का आत्मा आहत होती है तो वह सिधे राइटर,प्रोड्यूसर,एक्टर को टारगेट करता है,
आखिरकार कोई सेंसर बोर्ड से सवाल क्यों नहीं करता फिल्म में क्या उचित है क्या उचित नहीं है यह चेक करने का वेतन प्रसून जोशी ही ले रहे हैं ना तो उनसे सवाल क्यों नहीं पूछा जा रहा है कि आपने इस फिल्म को कैसे पास कर दिया?
केवल हमें ही क्यों सताया जा रहा है रे बाबा!
: Ok sir Thankyou.
✍Arjun Arun Rao
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