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19/03/2026

52 शक्तिपीठ हिन्दू धर्म के अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल माने जाते हैं, जो माता सती के शरीर के विभिन्न अंगों के गिरने से बने माने जाते हैं। पुराणों के अनुसार, जब भगवान शिव की पत्नी सती ने अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपमान सहन न कर स्वयं को अग्नि में समर्पित कर दिया, तब शिव अत्यंत क्रोधित होकर सती के शरीर को लेकर तांडव करने लगे। तब ब्रह्मांड को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े कर दिए, जो पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर गिरे और यही स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

शक्तिपीठों का महत्व
ये सभी स्थान शक्ति (देवी) और भैरव (शिव का रूप) के संगम माने जाते हैं।
हर शक्तिपीठ में देवी के अलग-अलग रूप की पूजा होती है।
भक्त यहां मनोकामना पूर्ति, शक्ति और शांति के लिए दर्शन करते हैं।
आपको आज नवरात्रि के के पहले दिन 52 शक्तिपीठ के बारे संक्षेप में बताते है।-
1. कामाख्या मंदिर – सबसे प्रमुख शक्तिपीठ, यहाँ देवी की योनि की पूजा होती है।

2. कालीघाट मंदिर – माँ काली का प्रसिद्ध मंदिर, पैर की उंगली गिरी मानी जाती है।

3. तारापीठ – तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र।

4. ज्वालामुखी मंदिर – यहाँ अनन्त ज्योति (अग्नि) स्वयं जलती रहती है।

5. नैना देवी मंदिर – देवी की आँखें यहाँ गिरी मानी जाती हैं।

6. चामुंडा देवी मंदिर – माँ चामुंडा का शक्तिशाली स्थान।

7. वैष्णो देवी मंदिर – भारत का अत्यंत प्रसिद्ध तीर्थ स्थल।

8. महाकालेश्वर क्षेत्र – महाकाली स्वरूप से जुड़ा स्थान।

9. हिंगलाज माता मंदिर – प्राचीन और कठिन यात्रा वाला शक्तिपीठ।

10. शारदा पीठ – ज्ञान और विद्या की देवी का स्थान।

11. गुह्येश्वरी मंदिर – तांत्रिक साधना के लिए प्रसिद्ध।

12. चंद्रनाथ मंदिर – पहाड़ी पर स्थित पवित्र स्थान।

13. जेसोरेश्वरी काली मंदिर – माँ काली का प्रमुख धाम।

14. प्रयाग शक्तिपीठ – संगम के पास स्थित पवित्र स्थान।

15. विंध्यवासिनी मंदिर – नवदुर्गा में प्रमुख देवी।

16. मंगला गौरी मंदिर – स्त्री सौभाग्य के लिए प्रसिद्ध।

17. त्रिपुर सुंदरी मंदिर – शक्ति के तीन रूपों का संगम।

18. कन्याकुमारी मंदिर – समुद्र किनारे स्थित देवी मंदिर।

19. कालमाधव शक्तिपीठ – प्राचीन तांत्रिक स्थल।

20. उज्जैनी शक्तिपीठ – धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित।

21. भीमाशंकर शक्तिपीठ – शिव-शक्ति का संगम स्थल।

22. श्रीशैलम शक्तिपीठ – ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों।

23. कांची कामाक्षी मंदिर – शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र।

24. महालक्ष्मी मंदिर – धन और समृद्धि की देवी।

25. तुलजा भवानी मंदिर – छत्रपति शिवाजी की आराध्य देवी।

26. सप्तशृंगी देवी मंदिर – पर्वत पर स्थित शक्तिपीठ।

27 अंबाजी मंदिर – गुजरात का प्रमुख शक्तिधाम।

28. चामुंडेश्वरी मंदिर – महिषासुर वध से जुड़ा स्थान।

29. शारिका देवी मंदिर – कश्मीर की अधिष्ठात्री देवी।

30. मणिकर्णिका घाट – मोक्ष से जुड़ा पवित्र स्थल।

31. विशालाक्षी मंदिर – काशी की शक्ति देवी।

32. कालभैरव मंदिर – शक्तिपीठ का रक्षक भैरव।

33. भद्रकाली मंदिर – शक्तिशाली देवी स्थल।

34. दक्षेश्वर महादेव मंदिर – सती कथा से जुड़ा स्थान।

35. किरितेश्वरी मंदिर – मुकुट (किरिट) गिरा था।

36. अट्टहास शक्तिपीठ – देवी का होंठ गिरा माना जाता है।

37. नलहाटेश्वरी मंदिर – गला (नल) गिरा माना जाता है।

38. योगाद्या मंदिर – देवी योगाद्या की पूजा।

39. रत्नावली शक्तिपीठ – देवी का रत्न भाग गिरा।

40. बहुला शक्तिपीठ – देवी बहुला का स्थान।

41. उजनी शक्तिपीठ – देवी की भुजा गिरी मानी जाती है।

42. कंकालताल शक्तिपीठ – कंकाल (हड्डी) गिरा।

43. फुल्लरा शक्तिपीठ – देवी के अधर से जुड़ा स्थान।

44. त्रिस्रोत शक्तिपीठ – तीन नदियों का संगम।

45. जयंती शक्तिपीठ – जयंती देवी का स्थान।

46. करवीर शक्तिपीठ – महालक्ष्मी से जुड़ा स्थान।

47. शोणदेश शक्तिपीठ – प्राचीन शक्ति स्थल।

48. मिथिला शक्तिपीठ – सीता जी की भूमि से जुड़ा।

49. कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ – महाभारत भूमि पर स्थित।

50. रामगिरि शक्तिपीठ – रामायण से जुड़ा स्थान।

51. ललिता देवी मंदिर – शक्तिपीठ रूप में पूजित।

52. कालेश्वरी शक्तिपीठ – प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिधाम।

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