Priya
17/12/2025
क्या आप जानते हैं कि गणेश चतुर्थी पर चाँद देखने से अशुभ क्यों माना जाता है? 🌝
एक बार गणेश जी ने खूब लड्डू खाए और अपने वाहन मूषक पर सवार हुए। अचानक चाँद ने उनका मोटा पेट देखकर हँसी उड़ाई।
गणेश जी क्रोधित हुए और बोले — “जो आज की रात तुम्हें देखेगा, वह झूठे आरोपों में फँसेगा!”
चाँद भयभीत होकर माफी माँगने लगा। तब गणेश जी ने कहा — “जो कोई इस दिन ‘सिंहासन बत्तीसी’ की कथा सुनेगा, उसका दोष दूर हो जाएगा।”
👉 सीख: दूसरों का उपहास करने से पहले सोचिए — सम्मान हर रूप में आवश्यक है।
16/12/2025
"क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु ने कभी एक ‘मछली’ का रूप लेकर पूरी धरती को बचाया था?" 🐠🙏
बहुत समय पहले, जब संसार पर प्रलय आने वाली थी, समुद्र की लहरें बढ़ रही थीं और सब कुछ जलमग्न होने वाला था। उस समय एक महान ऋषि— सत्यव्रत— दरिया किनारे तपस्या कर रहे थे। एक दिन जब वे अपने हाथों से जल में आचमन कर रहे थे, तो एक छोटी सी मछली उनके हाथों में आ गई।
मछली ने कहा – “हे ऋषि, मुझे बचा लीजिए, वरना बड़ी मछलियाँ मुझे खा जाएँगी।”
ऋषि को उस मछली पर दया आ गई। उन्होंने उसे अपने कमंडल में रख लिया। लेकिन थोड़ी ही देर में मछली बड़ी हो गई। ऋषि ने उसे घड़े में डाला, फिर तालाब में, फिर नदी में — और अंत में जब उसने महासागर का रूप ले लिया, तब ऋषि समझ गए कि यह कोई साधारण मछली नहीं!
तभी आकाशवाणी हुई — “मैं हूँ भगवान विष्णु, और शीघ्र ही एक भयानक प्रलय आने वाली है। तुम एक विशाल नौका बनाओ, उसमें सात ऋषियों और सभी जीवों के बीज रखो। जब प्रलय आएगा, मैं ‘मत्स्य अवतार’ बनकर तुम्हारी रक्षा करूँगा।”
और ऐसा ही हुआ। भगवान विष्णु ने मछली रूप में आकर नौका को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया — जिससे पृथ्वी पर जीवन फिर से शुरू हुआ। 🌍✨
👉 यह कथा हमें सिखाती है कि जब भी संसार या जीवन पर संकट आता है, भगवान सदा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं — किसी न किसी रूप में। 🙏
#धर्म #विष्णु_भगवान #मत्स्यावतार #पौराणिककथा
15/12/2025
भगवान कृष्ण और पूतना राक्षसी 👶
क्या आप जानते हैं कि शिशु कृष्ण ने राक्षसी पूतना का वध कैसे किया?
कंस ने पूतना राक्षसी को भेजा कि वह कृष्ण को मार डाले। पूतना ने सुंदर स्त्री का रूप धारण किया और गोकुल पहुंची।
उसने अपने स्तनों में विष लगाया और बाल कृष्ण को गोद में लेकर दूध पिलाने लगी। माता यशोदा को कुछ शक नहीं हुआ।
लेकिन कृष्ण साधारण शिशु नहीं थे। उन्होंने इतने जोर से पूतना का दूध पिया कि उसके प्राण ही खींच लिए। पूतना चीखती हुई अपने असली विशालकाय रूप में आ गई।
वह तड़पती हुई मर गई। सारे ग्वालबाल दौड़े आए। कृष्ण उसकी छाती पर खेल रहे थे।
ज्ञानी लोगों ने कहा - "जो भी भाव से कृष्ण के पास आता है, उसे वे स्वीकार कर लेते हैं। पूतना को भी मोक्ष मिल गया।"
सीख: भगवान की शक्ति अनंत है। बुराई कितनी भी चालाकी से आए, भगवान उसे नष्ट कर देते हैं। भक्ति से आने वाले को भगवान कभी नहीं ठुकराते।
🙏 कन्हैया लाल की जय 🙏
15/12/2025
माता अन्नपूर्णा और भगवान शिव 🍚
क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा क्यों मांगी?
एक बार भगवान शिव ने कहा कि यह संसार माया है, सब मिथ्या है। माता पार्वती ने सोचा - "अन्न भी तो इस संसार का हिस्सा है।"
माता पार्वती अचानक अंतर्ध्यान हो गईं। संसार में अकाल पड़ गया। अन्न का एक दाना भी नहीं मिलता था। देवता और मनुष्य भूख से व्याकुल हो गए।
तब माता पार्वती काशी में प्रकट हुईं और अन्नपूर्णा के रूप में सबको भोजन देने लगीं। भगवान शिव भी भिक्षुक बनकर उनके पास पहुंचे।
शिव ने हाथ में भिक्षा पात्र लेकर कहा - "माता, भिक्षा दो।" माता अन्नपूर्णा मुस्कुराईं और अपने हाथों से शिव को भोजन परोसा।
शिव को समझ आ गया कि अन्न ब्रह्म है, यह माया नहीं।
सीख: अन्न का सम्मान करना चाहिए। अन्न से ही जीवन है। जो अन्न को माया समझता है, वह भूल करता है। अन्नपूर्णा माता सबका पालन-पोषण करती हैं।
🙏 ॐ अन्नपूर्णे सदापूर्णे 🙏
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