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Photos from Ourliveindia's post 01/06/2026

एआई पत्रकारिता ही नहीं, मानवता के लिए भी चुनौती है : कर्णिक

रिपोर्टर नाम की संस्था को बचाने की है जरूरत - भुवनेश सेंगर।

हिन्दी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष होने पर मातृभाषा. कॉम व सहयोगी संस्थाओं की विचारोत्तेजक पहल।

इंदौर : हिन्दी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष पूर्ण होने पर मातृभाषा उन्नयन संस्थान, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्य ग्राम के संयुक्त बैनर तले विचारोत्तेजक व्याख्यान का आयोजन रविवार को इंदौर प्रेस क्लब के राजेन्द्र माथुर सभागार में किया गया। ‘हिन्दी पत्रकारिता की एआई युग से क़दमताल’ विषय पर अमर उजाला डिजिटल के नेशनल हेड जयदीप कर्णिक, द लपेटा के भुवनेश सेंगर, समागम के मनोज कुमार एवं अरविंद तिवारी ने अतिथि वक्ता के रूप में अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल पत्रकारिता अब एल्गोरिदम की ग़ुलाम होती जा रही है और पाठकों की वास्तविक पसंद पीछे छूट गई है। पत्रकारिता अब टीआरपी, व्यूज़ और ट्रेंड्स पर आधारित होती जा रही है, जो उसके पतन का कारण बन रही है।

कार्यक्रम में स्वागत भाषण मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’ ने दिया। अतिथि स्वागत प्रदीप जोशी, संजय त्रिपाठी, मणिमाला शर्मा, नितेश गुप्ता, डॉ. अखिलेश राव, विनीता तिवारी, जलज व्यास व जय सिंह रघुवंशी ने किया।

एआई पत्रकारिता ही नहीं मानवता के लिए भी चुनौती है।

मुख्य अतिथि जयदीप कर्णिक ने कहा कि ‘पिछले ढाई दशक में पत्रकारिता का स्वरूप तेज़ी से बदला है। तकनीक शेर की सवारी की तरह है, यदि आप उस पर सवार हैं तो वह आपकी ग़ुलाम है, लेकिन यदि वह आप पर सवार हो जाए तो वही तकनीक आपको निगल सकती है। पूर्व में जो पत्रकार जमीनी स्तर पर कड़े परिश्रम से नहीं गुज़रा है, वह एआई वाला ही बन कर रह जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘यदि आपके पास हुनर है तो आईटी आपके लिए उपयोगी है, लेकिन यदि आप केवल एआई के भरोसे हैं तो यह एक ऐसा गुब्बारा है, जो कभी भी फूट सकता है।’ उन्होंने कहा कि ‘एआई केवल पत्रकारिता ही नहीं, बल्कि मानवता के लिए भी चुनौती बन सकता है। इसके उपयोग को लेकर सजग रहने की ज़रूरत है। इसका विध्वंसकारी इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।’

अब कुतर्कों पर आधारित हो गई है पत्रकारिता।

पत्रकार भुवनेश सेंगर ने कहा कि ‘पत्रकारिता के 200 वर्षों की यात्रा में कई बड़े बदलाव आए हैं। पहले पत्रकारिता समाज सुधार, देश की आज़ादी और जनजागरण का माध्यम थी, लेकिन अब कुतर्कों पर आधारित पत्रकारिता की जा रही है।’ उन्होंने कहा कि ‘एआई से ज़्यादा ज़रूरी अपनी प्राकृतिक बुद्धिमत्ता को मज़बूत करना है। अब रिपोर्टर नाम की संस्था को बचाने की ज़रूरत है। पत्रकारिता अब एक इवेंट में बदलती जा रही है और ‘तुमको जो हो पसंद वही बात करेंगे’ की तर्ज पर चल रही है।’

पत्रकारिता में टिके रहने के लिए खुद को अपडेट करना जरूरी।

वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार ने कहा कि ‘यदि तकनीक को बोझ समझा गया तो इस दौर में पिछड़ना तय है। पत्रकारिता में टिके रहने के लिए ख़ुद को लगातार अपडेट करना ज़रूरी है।’

एआई ने काम को आसान बनाया है।

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद तिवारी ने कहा कि ‘एआई का दौर पत्रकारिता के लिए कई मायनों में फ़ायदेमंद है। इस तकनीक ने काम को आसान बनाया है। समय के साथ बदलना और उसके साथ चलना ज़रूरी है।’

इस अवसर पर ‘ई-साहित्य ग्राम डॉट कॉम’ वेबसाइट का शुभारंभ किया गया, वहीं समागम का लोकार्पण भी सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में अंकित तिवारी व देवेंद्र जैन का सम्मान भी किया गया।

कार्यक्रम का संचालन अंशुल व्यास ने किया। आभार कीर्ति मेहता ने माना। कार्यक्रम में इंजीनियर टी वाला व हिन्दीग्राम का सहभाग रहा। शहर के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं युवा छात्र-छात्राएँ इस अवसर पर मौजूद रहे।

Photos from Ourliveindia's post 30/05/2026

सड़क चौड़ीकरण के नाम पर तोड़फोड़ का जनहित पार्टी ने किया विरोध

छावनी क्षेत्र में निकाली न्याय यात्रा, बड़ी संख्या में प्रभावित रहवासी व दुकानदार भी हुए शामिल।

बिना मुआवजा दिए घरों - दुकानों पर बुलडोजर चलाने पर जताया आक्रोश।

इंदौर : बिना मुआवजा दिए शहर में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर की जा रही तोड़फोड़ को लेकर रहवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। प्रभावित लोग अपने - अपने तरीकों से नगर निगम की मनमानी के खिलाफ अपनी नाराजगी प्रकट कर रहे हैं। छावनी क्षेत्र में घर और दुकानों में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर की गई तोड़फोड़ के खिलाफ जनहित पार्टी ने न्याय रैली निकालकर प्रभावित लोगों के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद की।

जनहित पार्टी के नेताओं का कहना था कि शहर की पुरानी विरासत और बसे बसाए छावनी क्षेत्र को विकास के नाम पर बर्बाद कर दिया गया l छावनी क्षेत्र की 136 साल पुरानी बसाहट मलबे में तब्दील हो गई l कार्रवाई इतनी जल्दबाजी में की गई कि लोगों को अपने घरों से सामान भी निकालने नहीं दिया गया। यहां लोगों के पास घरों की वैध रजिस्ट्री भी है l नियम अनुसार लोगों को 7 दिन का समय दिया जाना था l पर केवल दो दिन पहले सूचना दी गई और नगर निगम के अधिकारी भारी बल के साथ लोगों के घर तोड़ने पहुंच गए l इतना ही काफी नहीं था, कई लोगों के मकान 10 फिट के बजाय 20 फीट तक तोड़े गए l

बिना मुआवजा दिए की गई इस तरह की तोड़फोड़ का जनहित पार्टी द्वारा कड़ा विरोध किया गया l पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक दिन पूर्व छावनी क्षेत्र में लोगों से संपर्क किया और शनिवार शाम 7:00 बजे छावनी के आसपास पूरे क्षेत्र में रैली निकालकर नगर निगम की इस अमानवीय कार्रवाई का विरोध किया जिसमें बड़ी संख्या में रहवासी उपस्थित थे l

रहवासियों ने की मुआवजे की मांग।

जनहित पार्टी के नेताओं का कहना था कि शहर के पुराने बसे क्षेत्र बियावानी, गणेशगंज, खजूरी बाजार व शीतला माता बाजार में नगर निगम की हठधर्मिता ने स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों का भारी नुकसान किया है। अब आगे शहर का विनाश ना हो इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए। मुंबई जैसे बड़ी आबादी वाले शहर में भी पुराने क्षेत्र में ऐसी तोड़फोड़ नहीं की जाती।

ट्रैफिक को बेहतर ढंग से मैनेज करें।

जनहित पार्टी के पदाधिकारी अभय जैन व सुभाष बारोड का कहना था कि बढ़ते ट्रैफिक को बेहतर ढंग से मैनेज किया जा सकता है। उसके लिए तोड़फोड़ की जरूरत नहीं होती। कहीं कार तो कहीं ऑटो को प्रतिबंधित किया जा सकता है l सब्जी वालों को, फेरी वालों को व्यवस्थित तरीके से बसाया जा सकता है।

जनहित पार्टी ने एफएआर और टीडीआर जैसे बेमतलब के कानूनों को रद्द करने और शहरी भूमि अधिग्रहण कानून के हिसाब से पुश्तैनी रजिस्ट्री वाले घर का बाजार मूल्य से दुगना मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने विकास की उस कथित अवधारणा को भी दरकिनार करने की मांग की जो पर्यावरण के विनाश को जन्म देती है।

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