Vedic Dharm

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30/11/2025

ओ३म्

02/11/2025

ईश्वर को पाना हमारी जीवन का परम लक्ष्य या मुख्य होनी चाहिए, क्योंकि वही आपकी समस्त दुखों को नाश कर सकते है, अन्य किसी में वो सामर्थ नहीं, उनका मुख्य नाम ओ३म् है, जिसका जप से आप अपने मन को शुद्ध, शान्त और एकाग्र कर सकते हो, इसकेलिए आपको किसी एकांत निर्जन पवित्र जगह पर घंटों बैठ कर नित्य सुबह शाम उसकी स्तुति, प्रार्थना और उपासना करनी चाहिए जिससे आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सको
Ratish Mishra

29/08/2025

#ईशावास्योपनिषद्
असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसाSवृता:।
तांस्ते प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जना:।।३||

आत्मा का हत्या/हनन करनेवाले लोग मनोपरांत घने अन्धकार से युक्त असुर लोक को प्राप्त होते हैं।

आत्मा का हनन जिन कारणों से होता है वो ये हैं:_
हिंसा (मन और कर्म से दूसरे जीव का हानि करना व सोचना), असत्य (झूठ बोलना), स्तेय (दूसरों की संपत्ति को अन्यायपूर्ण तरीके से लेना), अब्रह्मचर्य (कामुक इच्छाओं से युक्त)
परिग्रह (लालची और संपत्ति के प्रति आसक्ति)।

20/07/2025

आंख, नाक, कान, जिह्वा, मन आदि इन्द्रियों को पशुत्व के मार्ग से हटाकर अध्यात्म के मार्ग पर चलाना `प्रत्याहार` कहलाता है|
ये आष्टांग योग का 5वी अंग है |

13/07/2025

ओ३म्
त्वं हि नः पिता वसो त्वं माता शतक्रतो बभूविथ ।
अधा ते सुम्नमीमहे ।।-(अथर्व० २०/१०८/२)

अर्थ:-हे सबको बसाने वाले ! हे सबमें बसने वाले ! सैंकड़ों प्रज्ञाओं और बलों से युक्त ! तू ही हमारा पिता,पालक और उत्पादक है।तू ही माता के समान स्नेही और शिक्षक है,अतः हम तुझसे सुख की याचना करते हैं।

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