Jassi Petwar
साथियों, आज एक बार फिर देश के लाखों-करोड़ों बच्चों का भविष्य लीक हो गया।
एक बार फिर इस देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता लीक हो गई।
एक बार फिर NEET का पेपर लीक हो गया और इसके साथ ही लाखों परिवारों के सपने भी टूट गए।
बच्चे सालों तक मेहनत करते हैं, माता-पिता अपनी जरूरतें छोड़कर कोचिंग और पढ़ाई का खर्च उठाते हैं, लेकिन हर बार कुछ लोगों की लालच और सिस्टम की लापरवाही उनकी मेहनत पर पानी फेर देती है।
अब फिर वही होगा…
कहीं से गिरफ्तारी की खबर आएगी, कहीं पूछताछ होगी, कहीं कार्रवाई का दिखावा होगा।
लेकिन सवाल वही है कि 2017, 2021 और 2024 में जब NEET का पेपर लीक हुआ था, तब असली दोषियों का क्या हुआ? क्या किसी को ऐसी सजा मिली जिससे दोबारा कोई पेपर लीक करने की हिम्मत न करे?
सच्चाई यह है कि दोषी बच जाते हैं और सजा हर बार गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के मेहनती बच्चों को मिलती है। उनकी मेहनत, उनका समय और उनका भविष्य दांव पर लग जाता है।
जो सरकार एक परीक्षा को पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से नहीं करवा सकती, वह देश के युवाओं का भविष्य कैसे संभालेगी?
देश का युवा अब जवाब मांग रहा है।
13/05/2026
मेरे चुनाव प्रभार वाले सोनीपत वार्ड नंबर 1 से कांग्रेस पार्टी से पार्षद प्रत्याशी भाई जयकुमार खत्री को जीत की हार्दिक शुभकामनाएं।
वार्ड वासियों ने एक मेहनती, संघर्षशील नौजवान को अपना प्रतिनिधि चुना है, मै आप सभी का धन्यवाद करता हूं आभार प्रकट करता हूं।
हरियाणा का युवा आज मेहनत से नहीं हार रहा, बल्कि उस व्यवस्था से हारता दिखाई दे रहा है जो हर बार उसके सपनों के सामने नई दीवार खड़ी कर देती है। कोई बच्चा 4-4 साल तक लाइब्रेरी में बैठकर तैयारी करता है, कोई परिवार जमीन गिरवी रखकर पढ़ाई करवाता है, कोई मां अपने गहने बेच देती है… सिर्फ इस उम्मीद में कि उनका बच्चा एक दिन अपने ही प्रदेश में नौकरी पाएगा। लेकिन अब हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि मेहनत करने वाला युवा खुद से पूछने लगा है क्या इस प्रदेश में हमारे लिए कोई जगह बची भी है…?
Assistant Professor (Hindi) भर्ती में Unreserved की 67 सीटों में से 7 पद खाली छोड़ दिए गए, और जिन 60 पर चयन हुआ उनमें 41 उम्मीदवार दूसरे राज्यों से हैं। वहीं Psychology विषय में 320 से ज्यादा अभ्यर्थी सब्जेक्टिव परीक्षा में बैठे, लेकिन पूरी भर्ती में केवल 3 उम्मीदवार ही 35% तक पहुंच पाए। क्या सच में हरियाणा के बाकी सारे युवा अयोग्य थे…? या फिर भर्ती प्रक्रिया ऐसी बना दी गई है जहाँ मेहनत से ज्यादा किस्मत और व्यवस्था मायने रखने लगी है…?
प्रदेश का युवा अब सिर्फ रिजल्ट नहीं देख रहा, वह अपने भविष्य का टूटता हुआ भरोसा देख रहा है। जिन बच्चों को “पढ़ोगे-लिखोगे तो आगे बढ़ोगे” कहकर बड़ा किया गया, आज वही बच्चे डिग्रियां हाथ में लेकर अपने ही राज्य में खुद को बेगाना महसूस कर रहे हैं। NET qualified, PhD holders, university toppers और सालों तक तैयारी करने वाले युवा अगर लगातार बाहर होते रहें, तो सवाल युवाओं की योग्यता पर नहीं, पूरी व्यवस्था पर उठते हैं।
सरकार को समझना होगा कि यह केवल कुछ भर्तियों का मुद्दा नहीं है। यह उस पीढ़ी की बेचैनी है जो अपने हक और सम्मान के लिए संघर्ष कर रही है। क्योंकि जब अपने ही प्रदेश का युवा अपने ही भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगे, तब समस्या केवल बेरोजगारी नहीं रहती, वह व्यवस्था पर टूटते विश्वास की चेतावनी बन जाती है।
ये लो पत्ते खुल रहे है..!
कमीशनखोरी हो रही है..! 10 करोड़ के पेड़ लगाए लेकिन नज़र नहीं आ रहे..! खुद भाजपा विधायक स्वीकार कर रहे है कि कांग्रेस राज में जो सड़के बनी है वो मजबूत है आज तक नहीं टूटी और भाजपा के राज में जो भी सड़कें बनी सारी टूट चुकी है।
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