Fans Of Radha Rani.
03/05/2026
ललिता परम चतुर सब बातनि।
जानति है निज नेह की घातनि।।
पाननिं बीरी रुचिर बनावै।
रुचि लै रचि-रचि रुचि सौं ख्वावे।।
मुख सौ वचन सोई तौं काढ़ैं।
जातैं दुहुॅं मे अति रुचि बाढैं।।🌷
गोरोचन सम तन प्रभा,अद्भुत कही ना जाइ।
मोर-पिच्छ की भांति के, पहिरे बसन बनाइ।।🌹🌹
- हित ध्रुव दासजी (रस मुक्तावली लीला)
बरष गांठि ललिता लली, बरनि सुनाऊ बेन।
भादों सुदि छठी छबि भरी, सब उर आनंद देन।।
पिता विशोक सारदी माई। मंगल रच्यों सु कहौं न जाई। महाभान पुनि दुजों नाम । त्यों चम्पा जु माइ सुन ग्राम।।
🌺🌺
01/05/2026
वृंदावन में जब श्रीकृष्ण मथुरा चले गए, तब गोपियों का हृदय विरह से व्याकुल हो उठा। उनके लिए कृष्ण केवल एक प्रिय सखा नहीं, बल्कि उनके प्राणों के आधार थे।
कृष्ण के वियोग में गोपियाँ हर क्षण उन्हीं का स्मरण करती रहती थीं। उन्हें आकाश के बादलों में कृष्ण का श्याम स्वरूप दिखाई देता, कुंजों की हरियाली में उनकी मुस्कान झलकती, यमुना की लहरों में उनकी बाँसुरी की मधुर ध्वनि सुनाई देती। पेड़ों की शाखाओं, पुष्पों की सुगंध, मोरों के नृत्य और गायों की आँखों में भी उन्हें केवल अपने कान्हा ही दिखाई देते।
विरह की अग्नि में जलते हुए भी उनका प्रेम और अधिक पवित्र और गहरा हो गया। यह साधारण प्रेम नहीं, बल्कि परमात्मा के प्रति आत्मा की अनंत तड़प थी। गोपियाँ जानती थीं कि कृष्ण उनसे दूर होकर भी उनके हृदय में सदा विराजमान हैं।
इस प्रकार वृंदावन का प्रत्येक कण, प्रत्येक वायु और प्रत्येक दृश्य गोपियों के लिए श्रीकृष्ण का साक्षात् दर्शन बन गया।
16/04/2026
Ras Barsane wali
Holi ke Rasiya ki jai
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Telephone
Website
Address
125033