Islamic bate
सही हदीस
तुममें सबसे अच्छा वह है, जिसका अख़्लाक़ (व्यवहार) सबसे अच्छा हो।"
(सहीह बुखारी: 6035)
तुम ज़मीन वालों पर रहम करो, आसमान वाला (अल्लाह) तुम पर रहम करेगा।"
(सुनन अबू दाऊद: 4941)
17/04/2026
गाँव: जा पिया, कामरूप
प्रश्न: मुफ्ती साहब—क्या कैरम खेलना जायज है?
उत्तर: अगर बाजी लगाकर (शर्त के साथ) खेला जाए—तो यह जुए में बदल जाने के कारण कैरम खेलना हराम है। यह 'गुनाह-ए-कबीरा' (बड़ा पाप) है। क्योंकि पवित्र कुरान मजीद में जुआ खेलने की मनाही है।
(सूरा अल-मायदा, आयत नंबर-90)
यदि कैरम खेलने की आदत बना ली जाए और इससे नमाज के प्रति लापरवाही पैदा हो, तब भी कैरम खेलना हराम है। यह जायज नहीं है।
अगर बिना किसी शर्त या बाजी के सामान्य रूप से खेला जाए—तो यह 'मक़रूहे तहरीमी' (वर्जित के करीब) है।
(दारुल उलूम देवबंद: उत्तर संख्या 41631) मुफ्ती अमजद अली २४ जिलहज १४४६ हिजरी
६ आषाढ़ १९४७ (असमिया कैलेंडर)
२१ जून २०२५ अंग्रेजी
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