DAD LOVER
14/08/2024
एक बार एक थिएटर में एक शार्ट फ़िल्म दिखाई गई । जब फ़िल्म शुरू हुई तो सामने एक सफेद रंग का पंखा दिख रहा था ,
आस पास कोई हलचल नही सिर्फ रुका हुआ एक सफेद पंखा.. ये दृश्य करीब 6 मिनट तक चला तो लोग आपत्ति जताने लगे कुछ शिकायत करने लगे तो कुछ उठ कर जाने लगे .... 6 मिनट के बाद सीन का कैमरा उस पंखे से नीचे आता है एक बेड पर जिसपे एक अपाहिज बच्चा लेटा हुआ और ऊपर की ओर देख रहा होता है जिसकी रीढ़ की हड्डी में फैक्चर की वजह से वो हिल डुल भी नही सकता.. .... ...
फिर एक आवाज आती है
" अभी इस शार्ट फ़िल्म में मात्र 6 मिनट तक एक ही दृश्य लगातार दिखाया गया आप सभी को , उन 6 मिनटों में कई लोग चिल्लाने लगे धैर्य नही रख पाए और कई उठ कर जाने लगे ,, दूसरी तरफ एक बच्चा है जो पैरालाइज्ड है और वो अपने जीवन के ज्यादातर घंटे बस इसी दृश्य को ही देखता रहता है।।...
कभी-कभी हमें खुद को दूसरों की जगह रखकर यह समझने की ज़रूरत होती है कि हमें जो ईश्वर ने दिया है उसकी महत्ता कितनी है और हमें ऐसे स्वरूप को प्रदान करने के लिए ईश्वर का शुक्रिया अदा करना चाहिए ।।
. हमेशा अपनी समस्याओं को उनसे तुलना करें जो हमसे कई गुना समस्याओं से घिरे होतें है पर साहस नही खोतें... 🙏🙏🙏
आजकल के लड़के #नौकरी लगने के तुरंत बाद शादी करके दुलहन को सीधे नौकरी पर ले जाते हैं तथा सारा पढ़ाई का कर्ज , खेती का काम सब झंझट माता पिता के पास छोड़ जाते हैं । वो सबसे पहले शहर में #प्लाट लेने की सोचते हैं तथा माता पिता की ओर कम ध्यान देते हैं जो बहुत दुखदाई है ।
#फेसबुक पर माता पिता को भगवान ज्यादा वो ही लोग लिखते हैं जिनके माता पिता दयनीय स्थिति मे होने के बाद भी उनसे आशा नही करते ।कभी वो लोग गाँव आते हैं तो अपनी जेब पैसा नही देने हेतु माता पिता से खेती , भैंस आदि की कमाई का हिसाब अपनी पत्नी के सामने लेते हैं तथा उन्हें बहुत सुनाते हैं ।पत्नी भी उनमें कमी निकालकर अपना धर्म पूरा करती है।
यह माजरा करीब 90% लोगों का है जो शहर मे लोगों को #जन्मदिन की पार्टी देकर अपनी झूठी शान का बखान करते हैं । वो अपने पत्नी बच्चों के अलावा किसी पर एक पैसा खर्च नही करते ।
क्या इस हालत मे #समाज_सुधार की ओर अग्रसर माना जा सकता है।गाँव के अधिकांश लोग इसी तरह दुःखी हैं क्योंकि उनको बच्चे की नौकरी के कारण #व्रद्ध_पैंसन भी नही मिलती।
मा बाप कितने सपने सजोकर उन्हें पेट काटकर पढाते हैं फिर नौकरी या तो लगती नही या लगने के बाद बेगाने होना दुःखद है।आजकल लड़को की नौकरी लगे या ना लगे घर का काम तो मरते दम बुढों को ही करना पडता है।बच्चों को पढ़ाने का मा बाप को यही पुरस्कार है जी।
जो लोग #शोसल_मीडिया पर बड़ी बडी बातें करते हैं तथा लोगों का आदर्श बने हुए हैं तथा बड़े पदों पर आशीन हैं उनमें से अनेक भी अपने रिशतेदारों , माता पिता के प्रति निष्ठुर भाव रखते हैं ।🙏🙏cp
28/02/2023
वह घूंघट नहीं काढ़ती
पुरुषों से करती हैं बातें
मिलाती है हाथ
नहीं शर्माती सकुचाती
जोर से हंसती है
तर्क करती है
हर बड़े-छोटे की आंखों में आंखें डाल
पुरुषों के साथ करती है काम
वह करती है बहस खुलेआम
स्त्री-पुरुष सम्बन्धों पर, एड्स पर,
गर्भवस्था में उत्पन्न होने वाली
समस्याओं पर,
सड़कों बसों ट्रेनों में
घूरती लपलपाई कुंठित भूखी
आकृतियों को सबक सिखाने को
रहती है तत्पर...
मेरे पड़ोसियों की नज़र में
वह औरत बुरी है। 💖🙏
18/02/2023
एक चरित्रहीन औरत
पर मै हैरान हूँ.. !!
वो मुझे आज तक मिली नही..
ऐसा भी नहीं है कि
मैने उसे सही से तलाशा नही
मै गया था
वहां जिस ओर
दर्शन ,जाति और समाज
इशारा करते हैं
उस अड्डे पर
मै उन तमाम
औरतों के पास भी गया
जो देह को लेकर
बाजार सजाती थी ..
जो क्लबो मे अर्धनग्न हो..
नाचती गाती थी ...
जो हर रोज वासना के
नये नये किरदार निभाती थी ..
पति से आंखे चुरा..
गैर मर्द की बाहों मे प्रेम ढूढंती थी ..
मैने वो तमाम औरते देखी...
पर मै हैरान था.. !!
उनमें कही भी....
वो चरित्रहीन औरत नही थी
हां मजबूर औरते ज़रूर दिखी
पर वहां हर औरत के पीछे
एक पुरुष जरूर छिपा था
कायर कामुक वासना की कीचड़ मे
सर से पांव तक लिपत ..!!
शायद यही था....वो..
जिसने सबसे पहले
औरत को चरित्रहीन कहा..
🌹🙏
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