Jaat from Rajasthan
18/12/2025
शोंक का युद्ध 17वीं सदी में हुआ एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संघर्ष था, जो जाटों और मुग़ल सत्ता के बीच टकराव का प्रतीक माना जाता है। यह युद्ध मथुरा ज़िले के शोंक गाँव के आसपास हुआ, जब मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब के शासन में ब्रज क्षेत्र में सख़्ती, भारी कर और धार्मिक दख़ल बढ़ गया था। स्थानीय जाट किसान और ग्रामीण इससे बेहद नाराज़ थे और इसी असंतोष ने विद्रोह का रूप ले लिया।
इस विद्रोह का नेतृत्व गोकुला जाट ने किया। गोकुला कोई राजा नहीं था, बल्कि किसानों और सामान्य जाट समाज का नेता था, जिसने लोगों को संगठित कर मुग़ल अत्याचारों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई। जाटों ने खुले मैदान की लड़ाई के बजाय स्थानीय भूगोल का फायदा उठाया और गुरिल्ला शैली में मुग़ल चौकियों और टुकड़ियों पर हमले किए। शोंक के पास जब दोनों सेनाएँ आमने-सामने आईं तो लड़ाई बेहद भयंकर हुई और शुरुआत में मुग़ल सेना को काफ़ी नुकसान भी उठाना पड़ा।
हालाँकि मुग़ल सेना संख्या, संसाधन और हथियारों में कहीं अधिक शक्तिशाली थी। लंबे संघर्ष के बाद मुग़लों ने जाटों को घेर लिया। गोकुला जाट पकड़ा गया और बाद में उसे कठोर दंड देकर मार दिया गया। सैन्य दृष्टि से यह युद्ध जाटों की हार माना जाता है, लेकिन इसका असर बहुत गहरा था। इस संघर्ष ने यह साबित कर दिया कि ब्रज और मथुरा का क्षेत्र मुग़लों के लिए आसानी से काबू में आने वाला नहीं है।
शोंक का युद्ध जाट इतिहास में इसलिए खास माना जाता है क्योंकि यहीं से जाटों का संगठित प्रतिरोध शुरू हुआ। आगे चलकर इसी भावना ने चूड़ामन जाट और सूरजमल जैसे नेताओं को जन्म दिया, जिन्होंने भरतपुर जैसे मज़बूत जाट राज्य की स्थापना की। इसलिए शोंक का युद्ध केवल एक लड़ाई नहीं था, बल्कि जाट स्वाभिमान, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की भावना की शुरुआत था, जिसने मुग़ल साम्राज्य को अंदर से कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई।
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रूबिया लियाकत ने काँग्रेस समर्थक पत्रकार सतीश सिंह से पूछा कि वीर सावरकर कौन थे? तो सतीश सिंह ने कहा, "हिन्दू महासभा के अध्यक्ष थे।"
रुबिका: मतलब RSS के नहीं थे न?
सतीश सिंह: अरे RSS वीर सावरकर की विचारधारा से प्रेरित संगठन है। सावरकर ही एक तरह से RSS के संस्थापक थे।
रुबिका: तो RSS के यही संस्थापक सावरकर 11 साल तक काला पानी की जेल में बंद थे। और आप लोग कहते हैं कि RSS का एक आदमी आजादी के आंदोलन में जेल नहीं गया। अब मैं आपसे पूछती हूँ कि कांग्रेस के एक नेता का नाम बता दीजिए जिसे अंग्रेजों ने काला पानी की सजा दी हो।
सतीश सिंह: अब्बा, डब्बा, चब्बा!
रुबिका लियाकत: अंग्रेज, काला पानी की सजा उसे ही देते थे जिससे उनकी हुकूमत को खतरा होता था। जाहिर है कि अंग्रेजों को ज़्यादा खतरा सावरकर से था, नेहरू से नहीं।
सतीश सिंह: मेरे कहने का मतलब था...
रुबिका लियाकत: मतलब-वतलब बाद में समझाइयेगा। अभी ये वादा कीजिये कि आगे से आप ये कहना बंद कर देंगे कि आरएसएस का कोई नेता जेल नहीं गया। आप ही ने कहा है कि सावरकर RSS के स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा पुंज हैं।
प्रधानमंत्री पर कुछ बोलने या फेंकने से उस पद की गरिमा का अपमान नहीं बस मोदी का अपमान होता है और CJI पर जुता फेंकने से पद का अपमान होता है व्यक्ति का नहीं, दोगले पैदा हुए थे या बाद में बने
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