Poetry
21/06/2025
धड़कन के धुन में रहता हूं, जीने का यू आदी हूं मैं
मुर्दे मुझको बोल रहे हैं, जीवन का अपराधी हूं मैं
- दिव्यांश पाठक
04/02/2025
वर्ल्ड बुक फेयर लगा है। कोशिश यही कर रहा था कि नहीं जाऊंगा। पर अपने कई जगह कोशिश कर के इतना हार चुका हूं, कि इस कोशिश ने हार का कोई अतिरिक्त अफसोस नहीं दिया।
अक्सर किताब खरीदते हुए, मेरी कंजूसी मुझे दगा दे जाती है। और मैं खुद को लंबे बिल और झोले के साथ खड़ा हुआ पाता हूं। कुछ देर गुस्सा होता है, कि जितनी किताबें खरीद लिया हूं क्या उतना समय है मेरे पास पढ़ने का। पर फिर खर्चे और निवेश का फर्क समझ में आता है। यह किताबें एक बौद्धिक निवेश ही तो हैं, जो कि अभी की गईं पर भविष्य को बेहतर बनाने के लिए।
किताबें बहुत देखा, उठाया उससे कम और खरीदा बहुत ही कम, पर फिर भी ज्यादा हो गया। हालांकि सुख की जब भी कल्पना करता हूं, तो खुद को दुनिया के किसी अजनबी कोने में कोई अजनबी सी किताब पढ़ते पाता हूं। इस सुख के लिए इतना दुख तो लाज़मी है।
ज्यादातर फिलासफी की किताबें लिया। जीवन से सत्य सूख रहा है। अपने आस पास से प्रभावित होता रहता हूं, किंतु इस प्रभाव में आत्मा का अभाव न हो, इस कारण फिलासफी बहुत अनिवार्य हो जाती है। पिछले दिनों एक शेर साथ आया -
जग में हों कर के जोग में रहना
महज गिनती के लोग में रहना
इसको किरदार में सुमार करना है...
ओशो के स्टाल्स पर किताबों को छोड़ टाइटल भी मारक हैं - नाथिंग फेल्स लाइक सक्सेस, यह इतनी अद्भुत टाइटल थी कि मैं पूरी किताब खरीद लाया।
बहुत कुछ इस बार नया भी है, और पुराना नए तरीके से। यदि किताबों से ऊबे नहीं हैं आप, तो कृपया एक बार आ जाइए।
30/01/2025
दशरथ के बाद धरा पर 'हे राम' कह कर गिरने वाले दूसरे व्यक्ति - महात्मा गांधी को उनके पुण्य तिथि पर नमन 🙏
29/09/2024
दिल कहता है कि आंखो को तेरे तक रखें
और दुनिया की रवायत है बस लड़ते जाना
तो क्या तकाज़ा तरक्की का यही है केवल
जिसको चाहा था उसे छोड़ के बढ़ते जाना
- दिव्यांश पाठक
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