The gold point04
17/12/2025
रायमल भील बछवाल बाखासर
(1971 भारत–पाक युद्ध के वीर योद्धा)**
भारत की आज़ादी और अखंडता की रक्षा में जिन वीर सपूतों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया, उनमें से कई नाम इतिहास के पन्नों में दबा दिए गए। रायमल भील बछवाल, बाखासर ऐसे ही एक महान योद्धा थे, जिनका साहस, पराक्रम और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
1971 का भारत–पाकिस्तान युद्ध और रायमल भील
1971 के भारत–पाकिस्तान युद्ध के दौरान सीमावर्ती क्षेत्र बाखासर (बाड़मेर) देश की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील था। इसी युद्ध में ठाकुर बलवंत सिंह बाखासर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रायमल भील ने वीरता का अद्भुत परिचय दिया।
इतिहास गवाह है कि रायमल भील ने निडर होकर पाकिस्तान के छाछरा गांव में प्रवेश कर डंका बजाया, जो केवल एक प्रतीक नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि भारत की धरती और सम्मान की रक्षा के लिए इसके वीर किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। यह कार्य असाधारण साहस, रणनीति और आत्मबल का प्रमाण था।
आदिवासी वीरता की जीवंत मिसाल
रायमल भील आदिवासी समाज की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसने सदैव जल, जंगल, जमीन और देश की रक्षा के लिए संघर्ष किया। बिना किसी बड़े पद, प्रचार या पुरस्कार की लालसा के उन्होंने मातृभूमि की सेवा की। उनका जीवन बताता है कि वीरता किसी पहचान या पद की मोहताज नहीं होती।
दबा दिया गया इतिहास
दुख की बात है कि ऐसे महापुरुषों का इतिहास आज मुख्यधारा के इतिहास में वह स्थान नहीं पा सका, जिसके वे हकदार हैं। लेकिन समाज की जिम्मेदारी है कि हम अपने नायकों को पहचानें, उनके संघर्ष को लिखें और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।
आज का संकल्प
आज आवश्यकता है कि रायमल भील बछवाल बाखासर जैसे वीरों के नाम:
इतिहास में दर्ज हों
स्मारक, लेख, कार्यक्रमों के माध्यम से जीवित रहें
युवाओं को देशभक्ति और साहस की प्रेरणा दें
रायमल भील केवल एक नाम नहीं, बल्कि साहस, स्वाभिमान और देशभक्ति की अमर गाथा हैं।
🙏 ऐसे महान योद्धा को शत-शत नमन।
जय हिंद | जय वीर रायमल भील | जय आदिवासी शौर्य
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