Protect Child Rights at Banka
Teach them well and help them to lead the way show them all the beauty they possess inside. Give them a sense of price allows children to become responsible members of the classroom community & help them to develop their potential by believing in them as capable individuals. So they can express their own opinion and nurture their ideas. Their is a lifelong learning process about new philosophies a
07/09/2025
माता-पिता का कठोर शासन और बच्चों की मनःस्थिति
परिवार हर बच्चे की पहली पाठशाला होता है। यहीं से वह बोलना, सोचना, व्यवहार करना और रिश्तों को समझना सीखता है। लेकिन जब परिवार का वातावरण बहुत कठोर, डर और आदेशों से भरा हुआ हो, तो बच्चे के व्यक्तित्व पर गहरा असर पड़ता है।
कठोर अनुशासन का असर अक्सर उल्टा पड़ता है। जब माता-पिता हर गलती पर केवल डाँट या सज़ा का सहारा लेते हैं, तो बच्चा सच छिपाने लगता है। सच बोलने पर उसे अपमान या कठोरता का सामना करना पड़ेगा—यह डर उसके भीतर झूठ बोलने और छल करने की प्रवृत्ति को जन्म देता है। धीरे-धीरे वह यह मान बैठता है कि ईमानदारी उसे केवल नुकसान पहुँचाती है।
ऐसे वातावरण में पला बच्चा अंदर ही अंदर अवसाद की ओर भी बढ़ सकता है। जब उसे यह महसूस होता है कि उसकी बात सुनी ही नहीं जा रही, या उसकी भावनाओं की कोई कद्र नहीं, तो वह अकेलेपन और निराशा से घिर जाता है। आत्मविश्वास कम होने लगता है और वह अपनी ही क्षमताओं पर विश्वास खो बैठता है।
कई बार बच्चों का ध्यान गलत संगत या गलत आदतों की ओर भी मुड़ जाता है। घर में यदि अपनापन और स्वीकार्यता नहीं मिलती, तो वे उसे बाहर ढूँढ़ने लगते हैं—भले ही वह जगह सुरक्षित न हो। इसीलिए हम अक्सर देखते हैं कि कठोर शासन वाले परिवारों के बच्चे नशा, हिंसा या असुरक्षित गतिविधियों की ओर आकर्षित हो जाते हैं।
हर बच्चा प्यार, सम्मान और समझ की भाषा को सबसे गहराई से महसूस करता है। इसका मतलब यह नहीं कि अनुशासन की आवश्यकता नहीं है। लेकिन अनुशासन तब ही सार्थक है, जब वह समझ और संवाद के साथ जुड़ा हो। बच्चे को उसकी गलती बताना ज़रूरी है, लेकिन उसे यह भरोसा दिलाना और भी ज़रूरी है कि वह सुधार सकता है और परिवार हमेशा उसके साथ है।
इसलिए ज़रूरत है कि परिवार का माहौल कठोर शासन से निकलकर सहयोग और संवेदनशीलता की ओर बढ़े। जब माता-पिता बच्चों से खुलकर बात करते हैं, उनकी भावनाओं को महत्व देते हैं और गलती को सीखने का अवसर मानते हैं, तब बच्चा ईमानदार, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बनकर बड़ा होता है।
परिवार का कठोर शासन बच्चों को तोड़ता है, जबकि प्यार और संतुलित अनुशासन उन्हें गढ़ता है। बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित जगह उनका घर होनी चाहिए—जहाँ वे बिना डर के सच बोल सकें, गलती कर सकें और सीखते हुए आगे बढ़ सकें।
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Protect Child Rights at Banka Chhaya Verse Let's Inspire Bihar
06/09/2025
*शिक्षक दिवस और फूहड़ता का बढ़ता प्रचलन*
हर वर्ष 5 सितम्बर को हम शिक्षक दिवस मनाते हैं। यह दिन केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि शिक्षा के उस दीपक को नमन करने का अवसर है, जो अज्ञान के अंधकार से हमें प्रकाश की ओर ले जाता है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाना हमें यह याद दिलाता है कि *शिक्षक ही समाज का असली निर्माता होते हैं।*
लेकिन अफसोस की बात यह है कि आजकल शिक्षक दिवस का स्वरूप कई जगह बदलता जा रहा है। मंच पर फूहड़ नृत्य, बेहूदा नकल या बिना सोचे-समझे मनोरंजन ने इस पावन दिन की गरिमा को कम कर दिया है। यह चलन केवल अवसर की महत्ता को घटाता है, बल्कि *आने वाली पीढ़ी के सामने शिक्षा की छवि को भी हल्का कर देता है।*
हमें याद रखना चाहिए कि शिक्षक दिवस हंसी-मज़ाक का मंच नहीं, बल्कि कृतज्ञता और प्रेरणा का पर्व है। इस दिन का उत्सव इस तरह होना चाहिए कि *छात्र-छात्राएँ अपने शिक्षक की मेहनत, संघर्ष और योगदान को सम्मानपूर्वक याद करें।*
यदि हम शिक्षक दिवस को गरिमामय और सार्थक रूप दें, तो यह न केवल शिक्षकों के लिए सम्मान होगा, बल्कि बच्चों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनेगा। हमें तय करना होगा कि आने वाली पीढ़ी को हम कैसी विरासत सौंपना चाहते हैं— *फूहड़ता और हल्के मनोरंजन की, या आदर्श और कृतज्ञता की।*
✌️ #जनसुराजचर्चा
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