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23/09/2024
Super Star Singer Avirbhav👑
पूरे दो महीने बाद तनख्वाह मिला था।सोहन को पिछला महीना बहुत तंगी से निकला फिर भी घर में किसी को भनक तक नही लगने दी सबकी जरूरत का सामान समय पर ला कर दे दिया था।
अब जब तनख़्वाह मिली है तो माँ के एक साड़ी खरीद लेता हूँ, बच्चों के लिए मिठाई और सीमा को कुछ पैसे ही दे दूँगा,, ओ भी अपने मन का कर लेगी।यही सोचते हुए ऑफिस से निकला रास्ते मे बाजार से सामान लेकर घर को चल पड़ा ठंडी का मौसम समय से पहले ही शाम गहराने लगी थी।
घर के बाहर ही पुरानी शॉल ओढ़े माँ बैठी थी। अरे इतनी अंधेरे में येसे बाहर अकेली क्यूँ, बैठी हो ? कहते हुए मोटर साइकिल के बैग से सामान निकालने लगा। अंदर चलो माँ मै आपके लिए कुछ लाया हूँ। जो कुछ भी लाया है जा, जाकर दे अपनी जोरू को मुझे दो वक्त की रोटी दे रहा है वही बहूत है।
माँ एसी क्यूँ बोल रही हो कुछ हुआ है क्या फिर से तुम दोनों के बीच.. ना बेटा कुछ ना हुआ.... मै बोझ बन गई हूँ किसी काम की नही रही ना इसलिए!!!! मै तो लोक लिहाज के डर से इतना बर्दाश्त करती हूँ नही तो आज ही अपने रसोई अलग कर लूँ।
पर दुनियाँ क्या कहेगी यही कि इकलौते बेटे बहू का सुख भी बुढ़िया से देखी नही जा रही,,.. कहते कहते बुढ़िया रोने लगी..... अरे!!! माँ येसा क्या करती हो माँ सुनो तो आप समझने की कोशिश!!!!! हां अब तु भी मुझे ही समझाएगा तेरी जोरू तो बहुत समझदार हैं एक मै ही गवांर हूँ बुढ़िया और जादा बड़बड़ाने लगी।
बेचारे सोहन जो रास्ते भर सबको खुश देखने के लिए कल्पना की बड़ी बड़ी मीनारे बनाया था पल भर में ही धराशायी हो गया....... ।
जैसे ही सोहन कमरे मे आया, पत्नी भी क्यूँ पीछे रहती... देखो जी अभी के अभी फैसला करो कि आपको किसके साथ रहना है मै अब और तुम्हारी माँ की ज्यादती बर्दाश्त नही कर सकती,.... अरे सीमा ये क्या कह रही हो माँ हमारे साथ नही रहेगी तो कहाँ जाएगी? हां तुम्हारी माँ कहाँ जाएगी..!!! मैं ही पराए घर से आई हूँ मुझे ही जाना पड़ेगा मै हूँ ही कौन??सीमा का गुस्सा सातवें आसमान पर था।
अरे मैंने येसा तो नही कहा,.. सोहन हताश होकर बोला। जब परिवार संभालने की हिम्मत नहीं थी तो शादी ही क्यूँ की???बने रहते श्रवण कुमार....
हां मुझसे गलती हो गयी मेरी माँ!! कहकर हाथ जोड़ते हुए सोहन कमरे से बाहर निकल कर... घर की छत पर टहलने लगा...... सोचने लगा ये औरते भी कमाल होती है।. माँ अपने बच्चे के लिए, और पत्नी अपने पति के लिए कितना, भूख प्यास बर्दाश्त करती है।व्रत, उपवास दुनियाँ भर के नियम धीयम पालती हैं अपने पति और बच्चों के लिए मंदिर मंदिर देव पूजती है, बड़ा से बड़ा कष्ट सह लेती है, ये कैसा अनोखा प्यार है इन दोनों का!!!!!
पर बस दो बातें बर्दाश्त नही कर सकती, सास अपनी बहू का और बहू अपनी सास की बात बर्दाश्त कर ले बस फ़िर तो, घर में ख़ुशहाली आने से कोई नही रोक सकता,.... महिलाएँ देश की आधी आबादी हैं थोड़ी सहन शक्ति आ जाए तो घर, समाज और देश की शक्ल ही बदल जाए.. सोहन अपने आप ही बड़बड़ा पड़ता है..... हमेशा औरतें ही बेचारी नही होती......... माँ और पत्नी के बीच सामंजस्य ना बैठा पाने वाला मुझ जैसा पुरुष भी "बेचारा" होता है।
19/09/2024
अपनी मां से कहो कि प्रॉपर्टी मेरे नाम कर दे...
रात के दो बज रहे हैं पर मुझे नींद नहीं आ रही है। मन बहुत उदास है। एक बार पलट कर पति वीरेन की तरफ देखा तो वो बड़ी ही सुकून भरी नींद में सो रहे थे। एक बार तो देख कर मन घृणा से भर गया। पिछले कुछ दिनों में जो कुछ भी घटा है मेरे साथ, उसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया है। मेरा तो कोई अस्तित्व ही नहीं है। जिसने जैसा चाहा वैसा चलाया। और अब जैसा चाह रहे हैं वैसे ही सांचे में ढालने की कोशिश कर रहे हैं। और उसमें मेरे पति का योगदान सबसे ज्यादा है।
मेरा नाम रिया वर्मा है। मैं अपने ससुराल में छोटी बहू हूं। मेरे ससुराल में मेरी सास सरला जी, मेरे पति वीरेन और मैं और हमारा एक बेटा है।
अब आते हैं असल मुद्दे पर। दरअसल अभी एक महीने पहले मेरे पिता का आकस्मिक निधन हो गया। घर में मां के अलावा कोई नहीं बचा। मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूं। मम्मी पापा बताते थे कि मेरे जन्म के दो साल बाद एक बेटा हुआ था पर वह दो दिन से ज्यादा जी नहीं पाया। इसे अपनी नियति मानकर उन्होने मेरी परवरिश पर ही ध्यान दिया और दूसरे बच्चे की आस छोड़ दी।
खैर, पिताजी की मृत्यु के बाद अब कई फैसले लेने थे। सबसे बड़ा फैसला की मां कहां रहेगी? क्योंकि मां अब बिल्कुल अकेली हो चुकी थी इसलिए मैं उन्हें अकेला छोड़ना नहीं चाहती थी, लेकिन ससुराल में मां को लाने को भी तैयार नहीं थी। कारण, जब मेरे बेटे ने जन्म लिया था उस समय मेरी मां यहां एक महीने के लिए आई थी। मेरी सास और मेरे पति ने तो उन्हें नौकरानी ही समझ लिया था। बेचारी मेरी मां सुबह से रात तक काम ही लगी रहती थी। पर मजाल है कि दोनों मां-बेटे में से कोई उनकी मदद तो करा दे।
लेकिन इस बारे में वीरेन को कोई चिंता नहीं थी, बल्कि वह तो दिन-रात यही बातें करता था कि प्रॉपर्टी का क्या करना है? क्योंकि उसे अच्छे से पता था कि मां ने पूरा फैसला मेरे ऊपर डाल दिया है। लेकिन मैं तो यह देख कर हैरान थी कि ससुराल में तो मुझे कभी निर्णय लेने नहीं दिया जाता था। आज मेरे मायके में भी मुझे फैसले लेने का हक नहीं था। वीरेन मुझे अपने हिसाब से चलाने की कोशिश कर रहे थे।
इस एक महीने में मुझसे कई बार कह चुके हैं कि अपनी मां से कहो कि प्रॉपर्टी मेरे नाम कर दे तो मैं उनकी जिम्मेदारी उठाने को तैयार हूं। वैसे भी अब वह अकेली क्या कर लेंगी? किसी ना किसी सहारे की जरूरत तो पड़ेगी ही ना।
पर मेरा मन नहीं मानता। जो इंसान अपनी बीवी के हाथ में खर्चे देने से पहले दस बार सवाल जवाब करता है। दस बातें सुनाता है, वो उसकी मां की खर्चा उठा ले ऐसा हो नहीं सकता।
और दूसरी और जरूरी बात, उनके माँ ने कौन सी अपनी प्रॉपर्टी उनके नाम कर दी, पर फिर भी खुशी-खुशी उनका खर्चा तो उठा रहे हैं ना। तुम्हारे भैया भाभी तो बाहर रहते हैं। साल में दो-तीन बार आते हैं सारा खर्चा विरेन ही तो उठाते हैं। तो ये इंसान मेरी मां से सौदेबाजी क्यों करना चाहता है। बस यही बात मेरे दिल को चुभ रही है।
कल रात जब सासू मां से इस बारे में बात की तो उन्होंने मुझे ही डांट दिया,
"क्या गलत कह रहा है वो? मेरा बेटा तुम्हारी मां के खर्चे क्यों उठाएगा? बेचारे को कोल्हू का बैल समझ रखा है क्या?"
" पर माँजी जैसे आप हमारी जिम्मेदारी हो, वैसे ही मेरी मां भी तो हमारी जिम्मेदारी है ना"
" तू मेरी बराबरी अपनी मां से कर रही है? मैंने अपने बेटे को जन्म दिया है, पाल पोस कर बड़ा किया है। बदले में वह मेरी सेवा कर रहा है तो तुझे देखकर जलन हो रही है। इतना ही सेवा करवाने का शौक था तो एक बेटा और पैदा कर लेती तेरी मां। और वैसे भी औरत को क्या पता कि किस तरह से फैसले लेने है। तेरे पापा तो रहे नहीं अब तो निर्णय वीरेन ही लेगा ना"
इसके आगे मैं कुछ कह ना सकी। गलत तो कुछ कह नहीं रही थी वो। मैं बेटी हूं, बेटा नहीं, यह मेरी सास ने बता दिया था। पर बेटा मजबूत हो और बेटी कमजोर, ऐसा हो नहीं सकता। अब मेरे दिमाग में एक ही बात है। मैं निर्णय ले चुकी हूं कि मुझे क्या करना है। बस वह निर्णय लेकर मैं सो गई।
सुबह जब उठी तो आज की सुबह कुछ अलग ही लगी। मैं जल्दी जल्दी घर के काम कर रही थी। मुझे देखकर मेरी सासू मां वीरेन से बोली,
" आज बहू को कहीं जाना है क्या? बड़ी जल्दी जल्दी काम निपटा रही है"
मुझे देखकर वीरेन ने कहा,
" कहीं जा रही हो क्या तुम?"
" हां, मां के पास जा रही हूँ"
" क्यों? तुमने तो मुझसे पूछा भी नहीं "
" सोच रही हूँ कि वहां का घर बेच दूँ "
बात सुनकर वीरेन के चेहरे पर चमक आ गई। इससे पहले की वीरेन कुछ कहता, मैंने कहा,
" सोच रही हूँ कि वहां की प्रॉपर्टी बेचकर यहां मां के नाम से एक छोटा सा मकान ले लूँ और बाकी पैसे मां के नाम से अकाउंट में ट्रांसफर कर दूं। माँ के खर्चों में काम आएंगे। माँ पास में रहेगी तो मैं भी उन्हें आसानी से दिन में जाकर संभाल लूंगी"
" तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम मेरे फैसले के ऊपर जाओ। देख रहा हूं बहुत ज्यादा बोलने लगी हो आजकल"
"मैं आपके फैसले के ऊपर कहाँ जा रही हूँ? मैंने कभी ससुराल में बीच में नहीं बोला। कभी किसी निर्णय में आपने मुझे साथ में नहीं लिया। पर अब तो मेरे मायके से संबंधित फैसला लेना है और वह मैं ले सकती हूं। मेरी मां है, उन्होंने मुझे जन्म दिया है, तो उनके बारे में सोचने की जिम्मेदारी मेरी है ना। अगर मैं नहीं सोचूंगी तो लोग सौदेबाजी करने को तैयार हो जाएंगे। और वो मुझे मंजूर नहीं"
" बहु अपनी मां के लिए तू हम से लड़ने को तैयार है"
अबकी बार बीच में मेरी सास बोली।
"देखिए माँजी, कल आप ही ने मुझे यह रास्ता बताया था। आपने कहा था ना कि मेरा बेटा है वह तुम्हारी मां की जिम्मेदारी क्यों उठाएगा? इसी तरह मैं अपनी मां की बेटी हूं, अगर मुझे रोका तो मैं आपकी जिम्मेदारी नहीं उठाऊंगी। आप अच्छी तरह से याद रखिएगा आपका बेटा सिर्फ कमाता है पर इस मकान को घर मैं बनाती हूं"
मेरी बात सुनकर दोनों में से किसी ने कुछ नहीं कहा। जानती हूं नाराज है, तो नाराज रहने दो। इनकी नाराजगी के चलते मेरी मां को मुझे मोहताज थोड़ी ना करना है। बस फटाफट अपना काम निपटा कर मैं चल पड़ी थी अपने फैसले को अमल करने।
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