Azim Alig

Azim Alig

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01/03/2026

बर्बादी देखने में रस है... लेकिन वो बर्बादी किसी और की होनी चाहिए. इस रस में इतना आनंद है कि जितना व्यक्ति को अपने आप को सुखी देखने में नहीं है. कई मर्तबा किसी को बर्बाद होते देखना व्यक्ति की सबसे बड़ी चाहत भी बन जाती है, जिसमें वो यह भी चाहता है कि वो उस बर्बादी का गवाह भी बने...तालियां बजाए, सीटियां और पटाखे फोड़े....लेकिन यह तभी तक है जब तक रुख दूसरे की ओर है, जब अपनी बारी आती है तो फिर यही लोग RR शुरू कर देते हैं.....

कुछ यही हाल इस वक़्त अपने देश में मौजूद दोनों तरफ़ के अंधभक्तों का है, कुछ UAE, कतर, वगैरह की बर्बादी देखना चाहते हैं और कुछ ईरान, यमन, फिलिस्तीन की.....

ईरान में इजराहेल के हमले में सुप्रीम लीडर की शहादत के साथ साथ 85 बच्चियों की मौत होते हुए देखना भारत में एक पक्ष के लिए कितना सुखद रहा, इसका जवाब वो वीडियो और पोस्ट दे रहे हैं जो सोशल मीडिया पर हर दूसरी प्रोफाइल पर आपको देखने को मिल जाएंगे.....
यह एक ऐसी बर्बादी है जो दुनिया जहान के सभी मुद्दों को दरकिनार कर हम इमारतों को ढहते हुए देख रहे हैं, हर किसी के फोन में मिसाइल , ड्रोन गिरने के वीडियो मौजूद होंगे....
अंधभक्त दोनों तरफ़ हैं एक पक्ष घर में आराम से बैठा ईरान द्वारा इस्लामिक मुल्क़ों पर किए जा रहे हमलों पर जियोपोलिटिक्स का ज्ञानचंद बना हर दूसरे मिनट पर वीडियो फोटो पोस्ट करके वाह वाही और मज़े ले रहा है और वहीं सड़े हुए दूसरे अंधभक्त इजराहेल और अमेरिका जैसे दोगलों, एपीस्टीन फाइल्स के जनक शैतानों को बाप बना कर अली खामनेई की शहादत और ईरान पर हमले पर ख़ुशी का इज़हार कर रहा है....
कितने दोगले हैं लोग, ये भूल कर इस जंग में किसी भी ओर हों, मारे बेगुनाह ही जायेंगे, मगर किसे फ़र्क पड़ता है जब तक मिसाइल, ड्रोन का रुख हमारी तरफ़ नहीं है....
बाक़ी इतना देखकर हम रोमांचित हैं. यही हमारी सच्चाई है. हम किसी को बनते हुए देखकर इतना रोमांचित नहीं होते जितना उसको टूटते हुए, ध्वस्त होते या बर्बाद होते हुए देखकर होते हैं.....

बर्बादी देखने में इतना रस है कि हमने यह तलाशना शुरू किया कि इस बर्बादी से और क्या बर्बाद होगा और कहां हमला होगा ? और ये तलाश जारी रहती है. लेकिन उनका क्या जो बर्बाद हुए, और इसके दोषी कौन, वो शैतान के पुजारी जिसको मुसलमानों की दुश्मनी में एक समाज फादर लांड और बाप बना कर पूज रहा है.....

Abdul Azeem Alig

20/12/2025

एक रोज़ एक सो कॉल्ड अक्लमंद चावल को मुट्ठी में लेकर कह रहा था कि कि ये गेंहू हैं ,
बहस शुरू हो गई , हुजूम लग गया सब कह रहे थे कि ये चावल हैं वो अड़ा हुआ था कि गेंहू हैं , लड़ाई की नौबत आ गई फ़ैसला कल पर टाल दिया गया , अब रात को वो अक़्लमंद अपनी बीवी को बोलता है यार मैंने चावल को गेंहू बोल दिया है , कल सब लोगों के सामने फ़ैसला होगा अब कोई मशविरा दो मैं क्या करूँ ..
बीवी बोली बहुत ही आसान है , दुनिया चावल कहती रहे लेकिन आप अड़े रहना , आप मानना ही नहीं कि ये चावल हैं....
इस बात का जावेद अख्तर से कोई ताल्लुक़ नहीं है 😅😜

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